पैसे जमा करने वाले एजेंटों को ढूढ़ नहीं निवेशक, चिटफंडियों पर कोई कार्रवाई नहीं...
गुना। अपनी मेहनत से पहले पैसा कमाया, उसको दुगुना कराने के लालच में फंसे और लाखों रुपए जमा करा दिए, वह पैसा दुगुना मिलता कि इससे पहले वो कपंनी अपना सामान समेटकर भाग निकलीं। हाल ही में आधा दर्जन से अधिक चिटफण्ड कंपनियों में भी लोगों का पैसा डूबता नजर आ रहा है। उनको न तो ढूंढ़े कंपनी के लोग मिल पा रहे हैं और न ही एजेन्ट। वैसे तो एक दर्जन से अधिक कंपनियां बीते वर्ष में अपना कारोबार बंद करके यहां से भाग निकली हैं। चिटफंडियों के शिकार हुए कई लोग ऐसे हैं जो पैसे न होने के अभाव में अपनी लाड़ली बिटिया के हाथ भी पीले नहीं कर पा रहे हैं, वहीं कुछ लोग पैसा न होने पर इलाज न कराने से स्वर्ग सिधार चुके हैं। उधर एक भी चिटफण्ड कंपनी के विरुद्ध न तो प्रशासनिक कार्रवाई हो पाई और न ही पुलिस कार्रवाई। इस बीच कुछ नए चिटफण्ड कंपनियां पुन: पैर पसारने में लग गई हैं।
केस- 01
गुना में रहने वाली पुष्पा बताती है कि उसने जी लाइफ इंडिया में तीन साल पहले एक लाख रुपए करीब जमा किए थे, मगर वह नहीं मिले। पैसे के लिए कई जगह गई मगर किसी का भी पैसे वापस नहीं मिले।
केस- 02
सिसौदिया कॉलोनी में रहने वाले पीएस रघुवंशी बताते हैं कि उसने एक चिटफण्ड कंपनी में लगभग साठ हजार रुपए जमा किए थे। हमने पुलिस में शिकायत की, मगर वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ये हुए चिटफंड कंपनियों के शिकार
कल्पना, हल्की बाई कुशवाह, आनंद श्रीमाल, तपन सक्सेना, तोवन लाल अहिरवार, खुशी लाल अहिरवार, जुग्गा अहिरवार, देंवती अहिरवार, नरेन्द्र अहिरवार, माया बाई जाटव, श्रीबाई अहिरवार, लक्ष्मी बाई नामदेव, अरविन्द अहिरवार, मनोज अहिरवार, बलराम पाल, कालिया पाल, भगवान दास, गोविन्द, कल्लो हुसैन, अनीता बाई अहिरवार, शिवराज सिंह अहिरवार, सरोज आदि। बताया जाता है कि चिटफण्ड कंपनियों के कर्ता-धर्ताओं ने यहां के लोगों से पैसा एकत्रित किया जिससे दूसरे शहरों व राज्यों में यानि राजगढ़, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर , दिल्ली, हरियाणा जैसे शहरों में है।
निवेशकों को फांसा जाल में
चिटफण्ड कंपनियों में पैसा जमा करने वाले निवेशकों ने पत्रिका को बताया कि जब हमसे पैसा लिया गया उस समय एजेन्ट ने हमको बैंक से दुगुना ब्याज देने की बात कही। वहीं अनुबंध एक प्लॉट के नाम पर कराया, मगर न तो दुगुना ब्याज मिला और न प्लॉट। शैलजा बताती हैं कि मैंने जी लाइफ इंडिया में पैसा जमा किया, जब मुझे बच्ची की शादी के लिए पैसे की जरूरत पड़ी तो चक्कर लगवाते रहे, मगर पैसा नहीं मिला, मुझे दूसरी जगह से पैसा लेकर अपनी बेटी के हाथ पीले करना पड़े। कुछ लोगों ने बताया कि दूसरी कंपनियों में पैसे जरूरत पडऩे परमांगते रहे मगर वे नहीं मिले।
ये हैं नियम
- चिटफण्ड कंपनियों को खोलने से पूर्व नियमानुसार अनुमति लेना होगी। उस कंपनी के कर्ता-धर्ताओं का मप्र निक्षेपक के हितों का संरक्षण अधिनियम के तहत लिए गए पैसे को वापस भी करना होगा।
- सूत्रों ने बताया कि सन् 2००9-1० से शहर में जी लाइफ इंडिया, पल्र्स ग्रीन, सन इंडिया, गरिमा, परिवार, सहारा, सांई प्रसाद फूड लिमिटेड, एचवीएन, जैसी संस्थाएं सक्रिय हुईं और अपने-अपने एजेन्टों से निवेशकों के पैसे जमा कराने का कारोबार शुरू कराया था।
- जब यह रकम हजारों से बढक़र लाखों और करोड़ों पर पहुंची तो वे कार्यालय बंद करके भाग गए। इसके बाद लोग अपने पैसे वापस करने के लिए एजेन्टों के पास पहुंचे तो उनको जानकारी मिली कि कंपनी ही भाग गई, अब हम क्या करें।