बंदूक चोरी के मामले में घनश्याम की तलाश थी पंजाब पुलिस को
गुना/धरनावदा। बीते रोज दस हजार रुपए के इनामी घनश्याम पारदी को पकडऩे गई पुलिस टीम पर हमला करने वालों की शिनाख्त धरनावदा पुलिस ने कर ली है। दस हजार रुपए के इनामी घनश्याम पारदी की पंजाब पुलिस को बंदूक की तलाश थी। पुलिस के अनुसार धरनावदा थानांतर्गत खेजरा चक में दस हजार रुपए के इनामी बदमाश घनश्याम पारदी को पकडऩे के लिए थाना प्रभारी नीरज बिरथरे के नेतृत्व में एक टीम खेजरा चक गई थी, वहां जैसे ही घनश्याम पारदी को पकड़ा, वैसे ही उसके भाई परसराम एवं साथी शेरू पारदी, बनवारी और पवन पारदी आदि ने घनश्याम को छुड़वाने के लिए पुलिस पार्टी पर बंदूकों से फायर कर जानलेवा हमला कर दिया, पथराव कर दिया, जिसमें आठ बिरथरे समेत आठ पुलिस कर्मियों को चोटें आईं एवं पुलिस के वाहन तोड़ दिए।
धरनावदा थाना प्रभारी नीरज बिरथरे ने बताया कि दस हजार रुपए के इनामी बदमाश घनश्याम पारदी को मय बंदूक के पकड़ा है। इसके विरुद्ध हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, मारपीट, बलवा, नकबजनी, चोरी आदि के प्रकरण पंजीबद्ध हैं। जिनमें से पांच प्रकरणों में हाईकोर्ट एवं अन्य न्यायालयों से स्थायी वारंट जारी किए हैं। बताया जाता है कि पुलिस अधीक्षक के रूप में निमिष अग्रवाल के आने के बाद लगातार बदमाश किस्म के पारदियों की धरपकड़ के लिए दी जा रही दबिश से पारदियों में हौंसले पस्त होते जा रहे हैं जिसका परिणाम ये है कि बदमाश मोहर सिंह, रामगोपाल जैसे पारदी पकड़े जा चुके हैं। इससे घबड़ाकर वे पुलिस पर हमला कर रहे हैं।
मारपीट के मामले में दो भाइयों समेत 3 को सजा
इधर, पर्चे के विवाद पर मारपीट करने वाले तीन आरोपियों को कोर्ट ने दोषी माना और दो सगे भाईयों समेत तीनों को कोर्ट ने न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई। इसके साथ ही उनको 8००-8०० रुपए के जुर्माने से भी दंडित किया। सुनवाई जेएमएफसी आंकाक्षा कत्याल की अदालत में हुई। 17 सितंबर 2०14 को फरियादी मांगीलाल ओझा निवासी भार्गव कॉलोनी को आरोपी जनक ओझा ने उनको चर्चा के लिए ओझा धर्मशाला पर बुलवाया था, जहां विश्वकर्मा जयंती के पर्चे को लेकर वे लोग विवाद करने लगे और जनक ओझा ने रामदास ओझा और धर्मेन्द्र ओझा के साथ मिलकर उनकी मारपीट कर दी। मामले की कायमी उन्होंने कोतवाली में कराई। इस मामले की कायमी होने के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र कोर्ट में पेश किया, जिसकी सुनवाई के दौरान तीनों आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के आधार पर दोषी माना और जनक ओझा, रामदास ओझा एवं धर्मेन्द्र आझा में से प्रत्येक को धारा 323/34 भादंसं के आरोप में न्यायालय उठने तक के कारावास एवं 800 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा करने में व्यक्तिक्रम करने पर उन्हें 15 दिवस का साधारण कारावास अलग से भुगताया जाए।