कमला राजा अस्पताल के एक सुनसान गलियारे में दो महीने पहले मासूम लावारिस मिला था
ग्वालियर. कमला राजा अस्पताल के एक सुनसान गलियारे में लगभग दो महीने पहले जो मासूम लावारिस मिला था। वह अब अकेला नहीं है। जन्म के कुछ ही दिनों बाद एक निर्दयी मां अपने कलेजे के टुकड़े को अस्पताल में छोडकऱ गायब हो गई थी। उस वक्त मासूम की हालत नाजुक थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सों की मेहनत और ममतामयी देखभाल ने उसे नया जीवन दिया। और अब, पत्रिका की खबर के बाद तेज हुई प्रक्रिया के तहत, यह स्वस्थ बच्चा एक मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्था की गोद में नई जिंदगी की ओर बढ़ चला है।
अपने बच्चे की तरह संभाला
27 नवंबर 2025 को केआरएच के गलियारे में रोने की आवाज सुनकर मरीजों के परिजनों ने एक नवजात को कपड़े में लिपटा पाया। तत्काल उसे विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई में भर्ती कराया गया। शुरुआती दिनों में उसकी ङ्क्षजदगी और मौत के बीच जंग चल रही थी। लेकिन एसएनसीयू के डॉक्टरों और नर्सों ने उसे अपने बच्चे की तरह संभाला। लगातार निगरानी, उपचार और असीम स्नेह ने उसे धीरे-धीरे मौत के मुंह से बाहर निकाला। इन दो महीनों तक अस्पताल ही उसका घर था और स्टाफ ही उसका परिवार।
भावुक हुआ स्टाफ, जिंदगी देने वाले हाथों ने दी विदा
सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शुक्रवार को इस बच्चे को एक मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्था के हवाले कर दिया गया। मासूम को विदा करते समय एसएनसीयू स्टाफ और अस्पताल कर्मियों की आंखें नम थीं। जिन हाथों ने उसे जीवन दान दिया था, वे उसे एक नई और उम्मीद भरी ङ्क्षजदगी की ओर बढ़ते देख भावुक हो उठे। यह घटना केवल एक मां के त्याग की नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक अनूठी कहानी है।
संस्था करेगी बच्चे की देखरेख
&एसएनसीयू में दो महीने से भर्ती लावारिस बच्चे को सामाजिक संस्था को सौंप दिया गया है। संस्था अब आगे की कार्रवाई करके बच्चे की देखरेख करेगी और उसके भविष्य को संवारेगी।
डॉ. मक्खन माहौर, सहायक अधीक्षक, जेएएच