
ग्वालियर. आधार में नाम, सरनेम या जन्मतिथि में बदलाव कराना अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। कई मामलों में नाम में बड़ा बदलाव, सरनेम बदलने या शादी के बाद पूरा नाम बदलने के लिए राजपत्र यानी गजट में प्रकाशन कराना जरूरी है। इसके लिए लोगों को हजारों रुपए खर्च करने के साथ 3 से 6 महीने तक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है। मामूली टाइपिंग गलती या दस्तावेज की कमी होने पर आवेदन भी निरस्त हो जाता है।
गजट के फेर में 6 महीने, वकील-अखबार के चक्कर
आधार सेवा केंद्र संचालकों के अनुसार गजट प्रकाशन की सरकारी फीस 700 से 2500 रुपए तक है। इसके अलावा 50 रुपए के स्टांप पर शपथ पत्र, नोटरी, दो अखबारों में नाम परिवर्तन की सूचना, वकील की फीस और दस्तावेज तैयार कराने का खर्च जुड़ जाता है। कुल खर्च 5 से 10 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। कुछ मामलों में 15 हजार रुपए तक वसूले जाने की शिकायतें भी हैं। प्रक्रिया में 3 से 6 महीने लग रहे हैं। इस दौरान लोगों को आधार केंद्र, कोर्ट-कचहरी और अखबार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
इन मामलों में गजट जरूरी
छत्तीसगढ़ में 430 रुपए में ऑनलाइन सुविधा
मध्यप्रदेश में जहां नाम परिवर्तन के लिए लोगों को कई जगह जाना पड़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवा सेतु पोर्टल के जरिए राजपत्र में नाम प्रकाशन की ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। इसमें आवेदन घर बैठे किया जा सकता है। आवेदक को 430 रुपए का एसबीआई चालान, स्थानीय अखबार में प्रकाशित नाम परिवर्तन की सूचना, दो गवाहों के हस्ताक्षर वाला फॉर्म और 50 रुपए के स्टांप पर नोटरीकृत शपथ पत्र अपलोड करना होता है। शपथ पत्र में उल्लेखित दस्तावेजों की प्रतियां भी लगानी होती हैं। आवेदन के निराकरण के लिए 29 कार्य दिवस की समय सीमा तय है।
नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र में प्रकाशन जरूरी
यूआइडीएआइ की गाइडलाइन के अनुसार नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र में प्रकाशन अनिवार्य है। यह केंद्र सरकार का नियम है। गजट में नाम प्रकाशित हुए बिना ऐसे मामलों में आधार में नाम परिवर्तन नहीं किया जा सकता। आवेदन करने पर वह निरस्त हो जाता है। जन्मतिथि में सुधार को लेकर भी लोगों को परेशानी होती है।