ग्वालियर

मिलावट से भी बड़ा जहर है एफ्लोटोक्सिन

- जिलाधीश कार्यालय में हुई बैठक में खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण के सीइओ पवन अग्रवाल बोले

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मिलावट से भी बड़ा जहर है एफ्लोटोक्सिन
मिलावट से भी बड़ा जहर है एफ्लोटोक्सिन

ग्वालियर. मिलावट के जहर को तो आप दूर कर लेंगे किन्तु पशु जो चारा खा रहे हैं वह फंगस लगा हुआ तो नहीं है। फंगस वाला चारा खाने से जानवरों के पेट में एफ्लोटोक्सिन पैदा हो जाता है, जो कि मिलावट से भी बड़ा जहर है। इसलिए पशुपालकों को सलाह दें कि वह अपने पशुओं को फंगस लगा चारा नहीं खिलायें। इसके खाने से पशुओं के जरिए मानव शरीर में विषैला तत्व पहुंच रहा है। जो कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है, इसे रोकना होगा। यह बात एफएसएसएआइ (फूड सेफ्टी एवं स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के सीइओ पवन अग्रवाल ने कही। कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में शनिवार को आयोजित बैठक में उन्होंने ग्वालियर संभाग के सभी जिलों में खाद्य सुरक्षा से संबंधित बनाए गए प्रकरणों की सैम्पलिंग सहित की गई कार्रवाई की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा संचालित शुद्ध के लिए युद्ध की सराहना करते हुए कहा कि इसके सार्थक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। प्रदेश में संचालित शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट को खत्म करना है। इस दिशा में प्रदेश में तेजी के साथ कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को शुद्ध गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ प्राप्त हों, जिसमें किसी भी प्रकार का समझौता न हो। उन्होंने सलाहकार समितियों की बैठक भी नियमित रूप से आयोजित करने के जिला प्रशासन को निर्देश दिए। मिलावट को रोकने एवं मिलावटखोरों के विरूद्ध कार्रवाई किए जाने हेतु बड़े स्तर पर नमूने लेकर जांच की जाए और की गई कार्रवाई से जन सामान्य को बताएं। सीइओ पवन अग्रवाल ने बताया कि देश में 200 मोबाइल लैब शुरू की जा रही हैं। जिसमें मध्यप्रदेश की पांच मोबाइल लैब शामिल हैं।
प्रदेश में 1776 मिल्क प्रोडक्ट के प्रकरण बने
प्रदेश के नोडल अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि प्रदेश में राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की जा रही है। जिसके तहत अभी तक 106 एफआईआर, 40 एनएसए में कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि 23 करोड़ की सिंथेटिक खाद्य सामग्री जब्त की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1776 मिल्क प्रोडक्ट मिलावट के प्रकरण बनाए गए हैं जिसमें 1453 दूध के, 582 मावा प्रकरण और 502 पनीर के प्रकरण शामिल है। इसमें 4.5 करोड़ का जुर्माना कर 57 लाख की राशि वसूल की जा चुकी है। उन्होंने आगे बताया कि ग्वालियर, इंदौर एवं जबलपुर में नवीन प्रयोगशाला खोलने के लिए भूमि का चयन कर कार्य शुरू हो गया है। जबकि सागर एवं उज्जैन में बेसिक लैब शुरू की गई हैं।
ये बोले व्यापारी
बैठक के प्रश्नोत्तरकाल में खेरिज किराना व्यवसायी संघ के सचिव पारस जैन ने कहा कि लेबलिंग एवं पैकेजिंग के मामले में मामूली सी भूल पर 3 लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा रहा है, एक छोटा व्यापारी ऐसे में क्या करेगा। तब सीइओ ने पूछा कि इतनी पेनल्टी क्यों लग रही है। इसके लिए तो भूल सुधार का नोटिस दिया जाना चाहिए। दूध डेयरी व्यवसायी संघ के राष्ट्रीय महासचिव नरेन्द्र मांडिल ने क्रीम निकले हुए दूध को सप्रेटा दूध कहा जाता है, लेकिन मैसूर लैब में इसे सामान्य दूध की तरह इसके सैंपल को फेल कर दिया जाता है। सीइओ ने इसके लिए सभी लैब को निर्देशित करने के लिए कहा।
ये रहे मौजूद
बैठक में प्रभारी कलेक्टर शिवम वर्मा, अपर कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी अनिल कुमार, डिप्टी कलेक्टर पुष्पा पुषाम सहित संबंधित अधिकारी तथा व्यापारीगण आदि उपस्थित थे।

Published on:
04 Jan 2020 11:57 pm