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Assessment year 2025-26 : आयकर की नई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ये 6 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

अगर आप यह मानकर चल रहे हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न (आइटीआर) दाखिल करते ही आपकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है, तो अब सतर्क हो जाइए। आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जांच की ...

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New Income Tax Crackdown

New Income Tax Crackdown

ग्वालियर. अगर आप यह मानकर चल रहे हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न (आइटीआर) दाखिल करते ही आपकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है, तो अब सतर्क हो जाइए। आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जांच की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए कुछ मामलों में अनिवार्य स्क्रूटनी (कंपलीट स्क्रूटनी) का रास्ता साफ कर दिया है। अब केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जोखिम मूल्यांकन या रैंडम चयन के भरोसे जांच नहीं होगी, बल्कि तय श्रेणियों में आने वाले मामलों की विस्तृत जांच अनिवार्य होगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 30 जून 2026 तक ऐसे करदाताओं को स्क्रूटनी नोटिस जारी किए जाएंगे, जो विभाग की तय की गई विशेष श्रेणियों में शामिल होंगे।

सीबीडीटी ने तय की ये छह श्रेणियां, जिनमें आने वालों की होगी जांच

  1. सर्वे की कार्रवाई का सामना करने वाले करदाता: यदि 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद आयकर विभाग ने धारा 133ए के तहत किसी कारोबारी प्रतिष्ठान पर सर्वे किया है, तो संबंधित करदाता के रिटर्न की विस्तृत जांच की जाएगी।
  2. सर्च और सीजर की कार्रवाई वाले मामले: जिन करदाताओं के यहां धारा 132 के तहत सर्च (छापा) पड़ा है या दस्तावेज जब्त किए गए हैं, उन्हें अनिवार्य स्कू्रटनी का सामना करना पड़ेगा।
  3. धारा 148 के तहत पुराने मामलों की री-ओपनिंग: यदि सर्च या सर्वे से मिले इनपुट के आधार पर विभाग ने पुराने आकलन दोबारा खोलने के लिए धारा 148 का नोटिस जारी किया है, तो मौजूदा वर्ष का रिटर्न भी जांच के दायरे में आएगा।
  4. मान्यता के बिना टैक्स छूट का दावा करने वाले ट्रस्ट: वे ट्रस्ट, एनजीओ जिनकी मान्यता समाप्त हो चुकी है अथवा मंजूरी नहीं मिली है, फिर भी टैक्स छूट का लाभ ले रही हैं, उनकी जांच अनिवार्य होगी।
  5. पुराने विवादों को नए रिटर्न में दोहराने वाले करदाता: यदि पूर्व वर्षों में करदाता की टैक्स देनदारी बढ़ी थी और संबंधित मामला अदालत या ट्रिब्यूनल में विभाग के पक्ष में रहा, लेकिन वही विवादित दावा नए रिटर्न में दोहराया गया है, तो स्क्रूटनी तय।
  6. अन्य सरकारी एजेंसियों से मिली पुख्ता सूचना: जीएसटी विभाग, ईडी, सेबी से कर चोरी से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी आयकर विभाग को प्राप्त होती है, तो ऐसे मामले को अनिवार्य जांच में शामिल करेंगे।

एक्सपर्ट व्यू

दस्तावेजों की तैयारी अभी से करें: चार्टर्ड अकाउंटेंट अरुण डागा का कहना है कि विभाग अब पूरी तरह डेटा-ड्रिवन जांच प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में करदाताओं को अपने सभी वित्तीय दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई करदाता इन विशेष श्रेणियों में आता है, तो उसे बैंक स्टेटमेंट, लेन-देन से जुड़े बिल, लोन एग्रीमेंट व जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने चाहिए।

घबराएं नहीं: इन्हें मिली है बड़ी राहत!

इस कड़े कदम के बीच विभाग ने आम करदाताओं को पैनिक न होने की सलाह भी दी है। अगर आपके पास सिर्फ सामान्य सूचनाएं जैसे—

  • एआइएस (एनुअल इंफॉर्मेशन सिस्टम)।
  • एसएफटी (स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन)।
  • एनएमएस (नॉन-फाइलर्स मानिटङ्क्षरग सिस्टम)।
  • या धारा 142(1) का सामान्य पूछताछ नोटिस आया है।…तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि करदाता का केस सीधे स्क्रूटनी में चला गया है। जब तक ऊपर बताई गई स्पेशल-6 श्रेणियों में फिट नहीं होगा, तब तक उसकी फाइल सामान्य प्रक्रिया में ही रहेगी।