
Special Court for Cyber Crime: कैनरा बैंक के एटीएम को बनाया था निशाना (Photo Source - Patrika)
Gwalior news: एमपी के ग्वालियर मेंविशेष न्यायालय (साइबर क्राइम) ने कैनरा बैंक के एटीएम में हैकिंग के के जरिए जरिए 5.68 लाख रुपए चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड मेहराजउद्दीन को दोषी ठहराते हुए 8 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश विवेक कुमार की कोर्ट ने दोषी पर कुल की सजा 16,500 का अर्थदंड लगाने के साथ ही बैंक को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए 2 लाख अलग से प्रतिकर (मुआवजा) देने का आदेश जारी किया है। वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी सगीर अहमद को ठोस सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
अपर लोक अभियोजक घनश्याम मंगल ने बताया कि भोपाल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट सेक्शन के प्रबंधक विभू जोशी की शिकायत पर राज्य साइबर पुलिस ने केस दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और फोटो जब्त कर केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला चंडीगढ़ भेजे। सीएफएसएल रिपोर्ट में फुटेज में दिख रहे संदिग्ध के चेहरे और गिरफ्तार आरोपी मेहराजउद्दीन के फेशियल फीचर्स (माथा, हेयर लाइन, आई और नोज प्रोफाइल) का सटीक मिलान हुआ। कोर्ट में जब 16 जीबी की पेनड्राइव चलाई गई तो जज के समक्ष आरोपी की पूरी करतूत स्पष्ट हो गई।
27 मार्च 2016 की तड़के आरोपी एलएनआईपीई स्थित कैनरा बैंक के एटीएम कक्ष में दाखिल हुए। उन्होंने चाबी से एटीएम मशीन का फ्रंट पैनल खोला। मशीन के मदरबोर्ड के यूएसबी पोर्ट में पेनड्राइव और ब्लूटूथ/वायरलेस कीबोर्ड लगाकर पेनड्राइव में रखे हैकिंग ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड किया। मशीन को रीस्टार्ट कर जैकपॉट एप्लीकेशन के जरिए 8 अंकों का न्यूमेरिक कोड एंटर किया। आरोपी ने बिना किसी एटीएम कार्ड का इस्तेमाल किए मशीन से कई किस्तों में 5.68 लाखा की नकदी अवैध रूप से निकाल ली और बैग में भरकर फरार हो गए।
वहीं अन्य मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने पदम चंद्र मांझी सहित 10 याचिकाकर्ताओं की रिट याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि फर्जी या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने का संदेह है तो विभाग राज्य स्तरीय हाई पावर कास्ट स्क्रूटनी कमेटी की कार्रवाई से अलग अपनी विभागीय जांच भी जारी रख सकता है। याचिकाकर्ताओं ने विभागीय जांच और कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए कहा था कि उनके जाति प्रमाण पत्र का मामला पहले से हाई पावर कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए विभाग समानांतर जांच नहीं कर सकता। अदालत ने यह दलील अस्वीकार कर दी।
Updated on:
07 Aug 2026 05:55 pm
Published on:
07 Aug 2026 05:55 pm
