
gwalior dog sterilization scam- मध्यप्रदेश के ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी में घोटाला हुआ है। (फोटो pexels.com)
Gwalior Municipal Corporation scam- ग्वालियर नगर निगम के आवारा कुत्तों की नसबंदी (एबीसी) प्रोजेक्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में भुगतान पाने के लिए एक पशु चिकित्सक ने दूसरे के नाम का कूटरचित हलफनामा पेश किया। नगर निगम के एबीसी प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी की शिकायत पर जांच में आरोप सही पाए मिले।
पड़ाव थाना पुलिस ने पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। 2022 में सुर्खियों में आए इस मामले में चार साल बाद जांच पूरी होने के बाद एफआइआर दर्ज हो सकी है। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2022 में शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए दुर्ग छत्तीसगढ़ की एनीमल केयर फाउंडेशन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
संस्था ने दावा किया था कि 1 मार्च से 30 अप्रैल 2022 के बीच महज 61 दिनों में 656 श्वानों की नसबंदी की गई। मामले में पुलिस अब इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि क्या फर्जीवाड़े में नगर निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत थी।
नियमानुसार जिन आवारा कुत्तों को नसबंदी के लिए पकड़ा जाता है, ऑपरेशन के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ना होता है। नगर निगम में इसका शपथ-पत्र भी देना होता है। छत्तीसगढ़ की संस्था एनीमल केयर फाउंडेशन ने बताया कि 2022 में ग्वालियर के एबीसी सेंटर पर पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा पदस्थ थे। लेकिन, नगर निगम में जमा किए गए हलफनामे में पशु चिकित्सक डॉ. राघव पाराशर का नाम था। जांच में सामने आया कि निगम प्रशासन को गुमराह कर भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से दूसरे डॉक्टर के नाम का फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।
कुत्तों की नसबंदी में भी घोटाला
वेटनरी डाक्टर पर फर्जीवाड़े का आरोप
दूसरे के नाम पर दिया एफिडेविट
पड़ाव पुलिस जांच में जुटी
नगर निगम के एबीसी प्रोजेक्ट का मामला
नोडल अधिकारी ने दर्ज कराई एफआईआर
निगम प्रशासन को गुमराह करने का आरोप
डा. रविरमन शर्मा पर लगे आरोप
राघव पाराशर के नाम पर जमा किया शपथ पत्र
मध्यप्रदेश अजब भी है और गजब भी है। कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करोड़ों के घोटाले का मामला सामने आया है। ग्वालियर का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले रतलाम में भी आवारा कुत्तों की बढ़ती सख्या और डॉग बाइट की घटना को रोकने के लिए नसबंदी आपरेशन कराया गया था, लेकिन रतलाम नगर निगम में भी घोटाला हो चुका है। इस मामले की शुरुआत एक पार्षद भावना हितेश बेमाल की शिकायत से शुरू हुई थी। मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया था। जांच में सामने आया था कि 2022 से 2025 तक लगातार चार वर्षों तक बगैर निगरानी, भौतिक सत्यापन और प्रभावी मानिटरिंग के निजी फर्मों को भुगतान किया जाता रहा। 2022 से 2024 के बीच एक करोड़ 73 हजार 784 रुपए की गंभीर अनियमितता पाई गई थी। रतलाम नगर निगम में 33 हजार 630 कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया और करीब 2 करोड़ 29 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया। हैरानी का बात यह भी है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए इस काम में शहर में न तो आवारा कुत्ते घटे और न डाग बाइट की घटनाएं रुकीं। मजेदार बात तो यह भी है कि एक ही कुत्ते की चार-चार बार नसबंदी के मामले भी उजागर हुए हैं।
Updated on:
14 Jun 2026 12:42 pm
Published on:
14 Jun 2026 12:40 pm
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