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जेयू का ऑक्सीजन ट्रैक बना ‘डंपिंग यार्ड’, 7 फीट ऊंची दीवार भी नहीं रोक पा रही गंदगी

जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) परिसर में शहरवासियों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर स्वास्थ्य के लिए तैयार किया गया 2.40 किलोमीटर लंबा ऑक्सीजन ट्रैक अब असामाजिक तत्वों की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार होता नजर आ रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों से लोग जहां सुबह-शाम सैर और व्यायाम के लिए इस ट्रैक पर पहुंचते हैं, वहीं कुछ लोग इसे डंपिंग यार्ड में तब्दील करने पर आमादा हैं।

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जेयू का ऑक्सीजन ट्रैक बना 'डंपिंग यार्ड',

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शुद्ध हवा के लिए बनाए गए ट्रैक पर फेंके जा रहे कचरे के बोरे और शराब की बोतलें, सीसीटीवी नहीं होने से बेखौफ हैं असामाजिक तत्व
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) परिसर में शहरवासियों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर स्वास्थ्य के लिए तैयार किया गया 2.40 किलोमीटर लंबा ऑक्सीजन ट्रैक अब असामाजिक तत्वों की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार होता नजर आ रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों से लोग जहां सुबह-शाम सैर और व्यायाम के लिए इस ट्रैक पर पहुंचते हैं, वहीं कुछ लोग इसे डंपिंग यार्ड में तब्दील करने पर आमादा हैं।

स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय परिसर की सात फीट से अधिक ऊंची बाउंड्री वॉल भी कचरा फेंकने वालों को नहीं रोक पा रही है। सड़क की ओर से लोग घरेलू कचरे से भरे बोरे और पोटलियां दीवार के ऊपर से ट्रैक के भीतर फेंक रहे हैं। इससे ट्रैक का प्राकृतिक सौंदर्य प्रभावित हो रहा है और यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

चिंताजनक बात यह है कि ट्रैक पर केवल घरेलू कचरा ही नहीं, बल्कि शराब की खाली बोतलें भी फेंकी जा रही हैं। कई स्थानों पर कांच की टूटी बोतलें बिखरी पड़ी हैं, जिससे मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने आने वाले लोगों, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑक्सीजन ट्रैक शहर के चुनिंदा ऐसे स्थलों में शामिल है, जहां लोग प्रकृति के बीच शुद्ध हवा का आनंद लेने पहुंचते हैं। बावजूद इसके, इसकी साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

सीसीटीवी नहीं, इसलिए बढ़ रहे हौसले

पूरा ट्रैक क्षेत्र फिलहाल सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से बाहर है। तीसरी आंख का पहरा नहीं होने के कारण असामाजिक तत्वों की पहचान नहीं हो पा रही है और वे बेखौफ होकर गंदगी फैलाने में जुटे हैं। यदि ट्रैक पर निगरानी की समुचित व्यवस्था हो तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

सुबह 4:30 बजे से जुटने लगती है भीड़

ऑक्सीजन ट्रैक की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां सुबह 4:30 बजे से ही लोगों का आना शुरू हो जाता है। वहीं शाम पांच बजे के बाद भी बड़ी संख्या में नागरिक ईवनिंग वॉक और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं।

कार्रवाई का आश्वासन

जेयू के जनसंपर्क अधिकारी विमलेंद्र राठौर ने बताया कि ट्रैक पर निगरानी के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे। जो लोग परिसर में कचरा फेंकते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जेयू प्रबंधन के ये आश्वासन जमीन पर कब उतरते हैं और शहर को स्वच्छ हवा देने वाला यह ऑक्सीजन ट्रैक दोबारा अपनी पहचान हासिल कर पाता है या नहीं।