
Gwalior High Court: गलत जानकारी देना गंभीर कदाचरण (Photo Source - Patrika)
Gwalior news: एमपी के ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने वन विभाग में पदस्थ मानचित्रकार (ड्राफ्ट्समैन) चंद्रकांत निगम की बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने स्पष्ट किया कि सर्विस बुक में वास्तविक जन्मतिथि को छुपाकर गलत तारीख दर्ज कराना और सालों तक इसे सही न कराना गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है। चंद्रकांत निगम की नियुक्ति वन मंडल शिवपुरी में हुई थी। उनकी वास्तविक जन्मतिथि 21 जुलाई 1961 थी, जबकि सर्विस बुक में इसे 21 जुलाई 1967 दर्ज कराया गया था।
शिकायत मिलने पर जब जांच की गई तो पता चला 10 वीं की अंकसूची के आधार पर 6 साल का अंतर आया। इस आधार पर 2016 में उन्हें चार्जशीट दी गई और विभागीय जांच के बाद 17 जुलाई 2019 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
कोर्ट ने पाया कि सर्विस बुक के मुख्य पृष्ठ पर अपीलकर्ता के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान मौजूद हैं। ऐसे में यह दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता कि उन्हें गलत प्रविष्टि की जानकारी नहीं थी। अपीलकर्ता ने गलती पता चलने पर इसे सुधरवाने के बजाय विभागीय कार्रवाई का विरोध किया था। इससे स्पष्ट होता है कि वे अनुचित लाभ लेने की मंशा रखते थे। कोट ने माना कि सर्विस रूल्स का ऐसा उल्लंघन गंभीर श्रेणी में आता है और एकल पीठ द्वारा याचिका खारिज करने का निर्णय पूरी तरह न्यायसंगत है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज में दर्ज महत्वपूर्ण जानकारी की जिम्मेदारी से वह केवल अनभिज्ञता का हवाला देकर बच नहीं सकता।
चंद्रकांत निगम की ओर से तर्क दिया गया कि सर्विस बुक नियोक्ता की अभिरक्षा (कस्टडी) में रहती है। त्रुटि ध्यान में आते ही उन्होंने बोर्ड की अंकसूची जमा कर दी थी और गलत तारीख के आधार पर कोई अवैध लाभ नहीं उठाया था। शासन ने तर्क दिया कि कर्मचारी ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर 6 वर्ष अतिरिक्त नौकरी करने का प्रयास किया। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए थे, इसलिए बर्खास्तगी का दंड नियमानुसार सही है।
Updated on:
09 Aug 2026 05:58 pm
Published on:
09 Aug 2026 05:56 pm
