बिलौआ में काले पत्थर की खदानों में उपद्रव व गोलीबारी करना संदीप शर्मा को भारी पड़ गया। हत्या के आरोप में 2020 में मिली जमानत को जिला न्यायालय ने निरस्त कर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जमानत में लगी शर्त का स्पष्ट उल्लंघन है। अपराध की पुनरावृत्ति की है। मुरारा […]
बिलौआ में काले पत्थर की खदानों में उपद्रव व गोलीबारी करना संदीप शर्मा को भारी पड़ गया। हत्या के आरोप में 2020 में मिली जमानत को जिला न्यायालय ने निरस्त कर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जमानत में लगी शर्त का स्पष्ट उल्लंघन है। अपराध की पुनरावृत्ति की है। मुरारा थाना पुलिस ने संदीप शर्मा की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की थी। पत्रिका ने बिलौआ की खदानों में चली गोली व पत्थर की लूट की खबरों को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद पुलिस व प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर ने खनिज व राजस्व विभाग के अधिकारियों को जांच के लिए बिलौआ भेजा था। इन खदानों में भारी गड़बड़ी मिली थी और दबंगई दिखाकर पत्थर खनन किया जा रहा था।
मुरार पुलिस ने इन तथ्यों को रखा न्यायालय के सामने
दरअसल मुरार थाना पुलिस ने न्यायालय में रिपोर्ट पेश कर बताया कि 28 सितंबर 2017 को गंगा सिंह भदौरिया की रिपोर्ट पर संदीप शर्मा, राजेश शर्मा, सोनू शर्मा के दो अन्य साथी विरुद्ध धारा 302 सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है। इस केस के गिरफ्तार आरोपी संदीप शर्मा को हाईकोर्ट ने 26 जून 2020 को सशर्त जमानत दी थी। हाईकोर्ट शर्त लगाई थी कि ट्रायल के दौरान कोई अपराध कारित नहीं करेंगे। पुलिस ने इस मामले में जांच कर न्यायालय में चालान पेश कर दिया था। वर्तमान में जिला न्यायालय में विचारण चल रहा है। 2 फरवरी 2026 को बिलौआ थाने में संदीप शर्मा, आसू शर्मा, गौरव शर्मा, रोशन शर्मा के खिलाफ बिलौआ थाने में अपराध दर्ज हुआ है। जिसकी विवेचना चल रही है। संदीप शर्मा ने विचारण लंबित रहते हुए अपराध की पुनरावृत्ति की है। आरोपी ने जमानता की शर्त का स्पष्ट उल्लंघन किया है। मुरार पुलिस ने बिलौआ थाने में दर्ज अपराध को आधार बनाते हुए जमानत निरस्त करने की गुहार लगाई। कोर्ट ने पुलिस व आरोपी का पक्ष सुनने के बाद संदीप शर्मा की जमानत निरस्त कर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
आरोपी ने हाजिरी माफी चाही, वकील के माध्यम से भेजा आवेदन
मुरार पुलिस का आवेदन आने के बाद आरोपी संदीप शर्मा को नोटिस जारी किया गया, लेकिन संदीप शर्मा अनुपस्थित हो गए। अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी का आवेदन भेजा गया। आवेदन में तर्क दिया कि आरोपी पर सिर्फ अपराध दर्ज किया गया है। कोई अपराध प्रमाणित नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में पूर्व के किसी अपराध में जमानत निरस्त नहीं की जा सकती है।
- पुलिस की ओर से तर्क दिया कि आरोपी ने जमानत की शर्त का स्पष्ट उल्लंघन किया है। शर्त में लिखा था कि ट्रायल के दौरान अपराध की पुनरावृत्ति की तो जमानत स्वत: निरस्त हो जाएगी।