
ग्वालियर। पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शहर अब गंदगी से पटा जा रहा है। शहर की कई मुख्य रोड पर गदंगी के ढेर दिखाई दे रहे हैं। कई दिन तक कचरा उठाया नहीं जा रहा है। इसके चलते लोगों को मजबूरन सडक़ पर ही गदंगी फेंकना पड़ रही है। यह हालात तब हैं जब भाजपा शासित प्रदेश में ग्वालियर देश में स्वच्छता के मामले में २७ वें पायदान पर आया लेकिन अब प्रधान मंत्री मोदी का यह अभियान चुनाव आने से पहले ही शहर में दम तोड़ता जा रहा है।
शहर को गंदगी से मुक्त करने के लिए नगर निगम ने स्वास्थ्य अधिकारी सहित ८ सहायक स्वास्थ्य अधिकारी और ६६ डब्ल्यूएचओ रखे हैं। इनके अंडर में करीब तीन हजार से अधिक सफाई कर्मचारी हैं, जिन पर साल में करीब २५ करोड़ रुपए से अधिक वेतन भत्तों पर खर्च होता है और करीब २० करोड़ रुपए की लागत से पिछले कुछ वर्षों में मशीनरी क्रय की गई और हर साल करीब १० करोड़ का डीजल, मेंटेनेंस आदि पर खर्च होता है। इसके बावजूद शहर के बिगड़ते हालात ने अफसरों की कार्रवाई प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं शहर में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए अफसर कीटनाशक छिडक़वाने का प्रेस नोट जारी कर रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब कचरा समय पर उठाया ही नहीं जा रहा है तो फिर कीटनाशक छिडक़वाने का लाभ ही क्या है।
स्पॉट-१ सिल्वर स्टेट गोविंदपुरी रोड
सिल्वर स्टेट और आस पास के एरिया से पिछले तीन दिन से कचरा कलेक्शन नहीं किया गया है। इसके चलते लोगों को घर में कचरा रखना मुश्किल हुआ तो रोड पर कचरा डालना मजबूरी हो गया। यह हालात तब हैं जब उक्त रोड पर रहने वाले करीब ९९ प्रतिशत लोग समय पर टैक्स जमा करते हैं और यह शहर का सबसे पॉश इलाका है। इसके बावजूद गंदगी के ढेर ने निगम की सफाई वयवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्पॉट-२ फोर्ट रोड पुल हजीरा
हजीरा से किलागेट की ओर जाने वाले रोड पर स्वर्ण रेखा नदी पर बने पुल को अगर कचरे वाला पुल कहें तो गलत नहीं होगा। क्योंकि इस रोड पर वाहन नहीं गुजरते। इसे नगर निगम ने अघोषित रूप से कचरे का डंपिंग सेंटर बना रखा है। यहां भी पिछले तीन दिनों से कचरा नहीं उठाया गया है। इसके चलते रोड के दूसरी तरफ चलने वालों का भी बदबू से निकलना तक मुश्किल हो गया है। यह हालात तब हैं जब कि तानसेन मकबरा से किलागेट तक पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है।
स्पॉट-३ मिलेनियम प्लाजा के सामने
गोविंदपुरी रोड पर मिलेनियम प्लाजा के सामने कचरे का ढेर देखकर लोग निगम की सफाई व्यववस्था पर आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि शहर की वर्तमान में रेंकिंग कराई जाए तो शहर देश में फिर से ४०० वें स्थान पर पहुंच जाएगा।
स्पॉट-४ सचिन तेंदुलकर मार्ग
सचिन तेंदुलकर मार्ग हो या दूसरे रास्ते इन दिनों कचरे के ढेर रोड पर दिखाई देना आम बात हो गई है। जिससे स्वच्छता अभियान की पोल खुल रही है।
यहां कीटनाकों के छिडक़ाव का दिखावा-
बारिश के मौसम में संक्रामक बीमारियां डेंगू, मलेरिया की रोकथाम के लिए निगम ने दावा किया है कि सोमवार को वार्ड 02 में स्थित माहेश्वरी कॉलोनी, माहेश्वरी स्कूल, वार्ड 18 में स्थित डीडी नगर बी.एच. सेक्टर, वार्ड 46 में स्थित अशोक कालोनी, निम्बालकर की गोठ, जनक हॉस्पिटल, थौराठ गली, वार्ड 50 में स्थित जगन भैया की गली, बलराम चौक, राय सिंह का बाग, वार्ड 52 में स्थित चौरसिया कॉलोनी, कम्पू मोहल्ला, सिन्धी कॉलोनी, तिलक कॉलोनी, वार्ड 40 में स्थित भूरे बाबा की बस्ती, वकील गली, घोसी बाड़ा, खासगी बाजार, चाबड़ी बाजार, वार्ड 47 में स्थित लक्कडख़ाना, सात भाई की गोठ, सब्जी मंडी, माधोगंज, वार्ड 55 में स्थित गुड़ी पहाड़, प्रजापति मोहल्ला, कुशवाह मोहल्ला, सुदर्शन कॉलोनी, ईश्वर बिहार कॉलोनी आदि स्थानों पर फ ोगिंग मशीन से कीटनाशक दवा का छिडक़ाव कराया गया।
करेंगे बात-
शहर में सफाई के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। यह शिकायतें हमारे पास भी आ रहीं हैं। हम अफसरों से पूछेंगे कि आखिर एेसा क्यों हो रहा है।
धर्मेंद्र राणा, एमआइसी सदस्य नगर निगम
ठेकेदार से सांठगांठ-
अफसरों और भाजपा नेताओं की ठेकेदार से सांठगांठ हो गई है। कर्मचारी नौकरी पर आते नहीं ओर वेतन का भुगतान कर दिया जाता है। इसीलिए शहर के हालात बिगड़ रहे हैं।
कृष्णराव दीक्षित, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम।