
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : कारण आदेश की धडकऩ होते हैं, बिना वजह बताए कर्मचारियों पर थोपी गई सजा
ग्वालियर. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने विभागीय जांच और कर्मचारियों पर की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई को लेकर बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की रिट अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कारण किसी भी आदेश की धडकऩ (हार्टबीट) होते हैं। बिना स्पष्ट कारण बताए किसी भी कर्मचारी को दंडित करना पूरी तरह असंवैधानिक और कानून के खिलाफ है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने कर्मचारी पीएस तोमर को कारण बताओ नोटिस जारी कर कुछ आरोप लगाए थे। कर्मचारी ने नोटिस का ङ्क्षबदुवार जवाब पेश किया और सभी आरोपों से इनकार किया। लेकिन अनुशासनिक प्राधिकारी ने न तो कोई पूर्ण विभागीय जांच कराई और न ही कर्मचारी के बचाव तर्कों का विश्लेषण किया। प्राधिकारी ने केवल इतना लिखकर कि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया कर्मचारी की एक वेतनवृद्धि (बिना संचयी प्रभाव के) रोकने का आदेश जारी कर दिया।
इसके खिलाफ दायर अपील भी अपीलीय प्राधिकारी ने खारिज कर दी। दंड के आदेश को कर्मचारी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। ङ्क्षसगल बेंच ने आदेश को बिना कारण मानते हुए निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ बिजली कंपनी ने डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की।
Updated on:
1 Nov 2026, 2:36 AM IST
Published on:
1 Nov 2026, 2:35 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.