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कुत्तों की नसबंदी पर प्रदेश में सबसे ज्यादा खर्च, फिर भी सड़कों पर झुंड बरकरार, रोज 40 से 50 डॉग बाइट

शहर में आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए नगर निगम हर साल नसबंदी और टीकाकरण अभियान पर खर्च कर रहा है, लेकिन सड़कों और गलियों में कुत्तों के झुंड अब भी लोगों के लिए परेशानी ...
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ग्वालियर

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Rizwan Khan

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Updated: 29 Oct 2026, 5:41 PM IST

dog problem

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  • शहर में कुत्तों की गिनती तक नहीं, रोज 30-35 कुत्ते पकड़ने का ठेका करीब एक करोड़ में, निगम का दावा
  • प्रतिदिन 50 से ज्यादा की नसबंदी- आखिर कितने कुत्ते: निगम का अनुमान 50 हजार, पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड में 24 हजार; बिना पुख्ता गणना के चल रहा आबादी नियंत्रण अभियान

ग्वालियर. शहर में आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए नगर निगम हर साल नसबंदी और टीकाकरण अभियान पर खर्च कर रहा है, लेकिन सड़कों और गलियों में कुत्तों के झुंड अब भी लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं। प्रदेश में एक कुत्ते की नसबंदी पर सबसे ज्यादा 1170 खर्च करने के बावजूद अभियान के असर पर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोपाल में यही खर्च करीब 1000 और जबलपुर में 968 बताया गया है। इसके बावजूद ग्वालियर में आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए व्यापक गणना तक नहीं हुई है। वहीं शहर के मुरार, हजीरा और जेएएच में रोजाना 40 से 50 डॉग बाइट के केस पहुंच रहे हैं।

नगर निगम का अनुमान है कि शहर में 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, जबकि पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड में इनकी संख्या करीब 24 हजार बताई जा रही है। यानी दोनों आंकड़ों में ही करीब 26 हजार का अंतर है। ऐसे में सवाल यह है कि जब कुत्तों की संख्या का सटीक रिकॉर्ड नहीं है, तो नसबंदी और टीकाकरण अभियान की सफलता कैसे मापी जा रही है? खर्च का हिसाब तो सामने है, लेकिन कुत्तों की आबादी कितनी घटी और लोगों को कितना सुरक्षित किया गया, इसका स्पष्ट जवाब नहीं है।

रोज 30-35 पकड़ रहे, नसबंदी 50 से ज्यादा की कैसे?

नगर निगम ने कुत्तों को पकड़ने का ठेका करीब एक करोड़ रुपए में एनिमल केयर फाउंडेशन को दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टीम रोजाना 30 से 35 कुत्ते पकड़ रही है। वहीं निगम का दावा है कि प्रतिदिन 50 से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी हो रही है। बिरला नगर पुल और लक्ष्मीगंज के नीचे संचालित दो एबीसी सेंटरों में डॉक्टरों की निगरानी में यह प्रक्रिया की जा रही है। यदि रोजाना 30-35 कुत्ते ही पकड़े जा रहे हैं, तो 50 से ज्यादा की नसबंदी किन कुत्तों की हो रही है? क्या इसमें पहले पकड़े गए कुत्ते भी शामिल हैं या आंकड़े अलग-अलग दिनों और कार्यों के हैं?

इन इलाकों में झुंड से लोग परेशान

  • नौगजा रोड, शिंदे की छावनी, रामदास घाटी, लक्ष्मण तलैया, कोटेश्वर, आनंद नगर, विनय नगर, किला गेट, सेव नगर, फूलबाग, नदी गेट, नई सड़क, माधव कॉलेज, लक्ष्मीगंज चौराहा, थाटीपुर, भीमनगर, गोले का मंदिर, चेतकपुरी रोड और हुरावली रोड सहित कई स्थानों पर लोगों ने कुत्तों के झुंड की समस्या बताई है।
  • इन इलाकों में समस्या की गंभीरता का आकलन करने के लिए यह देखना जरूरी है कि कितने कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन हुआ है। यदि एक ही इलाके में बार-बार झुंड दिखाई दे रहे हैं, तो वहां अभियान की नियमित निगरानी और दोबारा सर्वे की जरूरत है।

इनका कहना

कुत्तों को लेकर निगम लगातार अभियान चला रहा है और वाहन संख्या भी बढ़ा दी गई है। यदि कुत्ते कम पकड़े जा रहे है और नसबंदी ज्यादा हो रही है तो इसकी जांच कराकर हम कार्रवाई करेंगे।

  • अभिषेक चौधरी, आयुक्त नगर निगम