29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

त्योहारों में साइबर ठगी का महाजाल, 663 के रिफंड के चक्कर में गंवाए 99 हजार

. त्योहारों पर खरीदारी की खुशी साइबर ठगों के लिए कमाई का मौका बन गई है। बाजार में छूट और ऑनलाइन शॉपिंग के बीच ठग क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, अटके हुए पेमेंट का रिफंड दिलाने और गिफ्ट वाउचर देने के नाम पर लोगों की जमा पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

ग्वालियर

•

image

Rahul Thakur

•

Updated: 29 Oct 2026, 5:56 PM IST

साइबर ठगों

साइबर ठगों

ग्वालियर. त्योहारों पर खरीदारी की खुशी साइबर ठगों के लिए कमाई का मौका बन गई है। बाजार में छूट और ऑनलाइन शॉपिंग के बीच ठग क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, अटके हुए पेमेंट का रिफंड दिलाने और गिफ्ट वाउचर देने के नाम पर लोगों की जमा पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। नवदुर्गा से करवाचौथ तक महज 17 दिन में शहर और देहात में साइबर ठगी की करीब 20 वारदातों में 18 लाख 73 हजार 236 रुपए पार हो गए। यानी रोज औसतन 1.10 लाख रुपए से ज्यादा की चपत लगाई गई। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर केस दर्ज किए हैं, लेकिन आरोपियों तक पहुंचने में सफलता नहीं मिली है।

कंपनी का कस्टमर केयर नंबर तलाशना ही पड़ गया भारी
विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र की गोविंदपुरी कॉलोनी में रहने वाले रविशंकर गुप्ता ने बिग बास्केट से खरीदारी की थी। उनका 663 रुपए का भुगतान अटका हुआ था। रिफंड पाने के लिए उन्होंने गूगल पर कंपनी का कस्टमर केयर नंबर तलाशा, लेकिन वहां ठगों का नंबर दर्ज था। फोन करने पर खुद को कंपनी का कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति ने एक फाइल डाउनलोड करने को कहा और 24 घंटे में पैसा लौटने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उनके खाते से 99 हजार रुपए निकल गए। इसी कॉलोनी के अमरसिंह शेखावत ब्लिंकिट से खरीदे सामान का रिफंड चाहते थे। गूगल से मिले फर्जी कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करने के बाद ठगों ने उन्हें क्यूआर कोड भेजा और प्रक्रिया शुल्क के नाम पर भुगतान करने को कहा। इसके बाद उनके खाते से 30 हजार रुपए निकल गए। दोनों मामलों में रिफंड की उम्मीद लेकर संपर्क करने वाले ग्राहक खुद ठगों के जाल में फंस गए।

20 पीड़ितों से 18.73 लाख रुपए की ठगी…
पिछले 17 दिनों में सामने आए मामलों में फोन हैङ्क्षकग, एपीके फाइल और बैंककर्मी बनकर ठगी जैसे तरीके शामिल हैं। दर्ज विवरण के मुताबिक, महाराजपुरा के महेश केन के खाते से 98,888 रुपए, मुरार की विनीता के खाते से 98,843 रुपए और डीडीनगर के सौरभ सिंह के खाते से 60 हजार रुपए निकाले गए। हजीरा के सुमेन्द्र सिंह यादव से 2.02 लाख रुपए और गोसपुरा नंबर एक के सौरभ गुप्ता से करीब दो लाख रुपए की ठगी हुई।

क्रेडिट लिमिट से गिफ्ट वाउचर तक, तीन बड़े पैंतरे
-साइबर सेल निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह कुशवाह के अनुसार, त्योहारों में खरीदारी बढ़ने के साथ ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। वे लोगों की जरूरत और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। उनके प्रमुख हथकंडे हैं—
-गिफ्ट और रिवॉर्ड पॉइंट: दिवाली गिफ्ट वाउचर या रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के नाम पर वॉट्सऐप से एपीके फाइल भेजना।
-तुरंत रिफंड का झांसा: अटके हुए भुगतान को मिनटों में वापस दिलाने के नाम पर संदिग्ध ऐप डाउनलोड कराना या क्यूआर कोड भेजना।
-क्रेडिट कार्ड का लालच: कार्ड की लिमिट कई गुना बढ़ाने और तुरंत नया कार्ड दिलाने का झांसा।

सतर्कता ही बचाव…
किसी कंपनी का कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप से लें। एपीके फाइल डाउनलोड न करें, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप की अनुमति न दें और ओटीपी, सीवीवी या बैकिंग पासवर्ड साझा न करें। क्यूआर कोड स्कैन करने से भुगतान होता है, पैसा प्राप्त नहीं होता। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।