आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम
ग्वालियर.
आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ लॉ की ओर से स्नातकोत्तर कानूनी अध्ययन और सामाजिक कानूनी अनुसंधान केंद्र ने मानवाधिकार एवं क्लीनिकल लीगल एजुकेशन इन कोटेक्स्ट ऑफ मल्टी डाइमेंशनल अप्रोच टू सोशल जस्टिस’ विषय पर 15 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम किया। विषय विशेषज्ञ के रूप में न्यायामूर्ति डॉ. सतीश चंद्रा, इलाहबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट डॉ. आशा वर्मा, भोपाल से डॉ. बीपी सिंह, रायपुर से डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव, इंदौर से प्रोफेसर डॉ. एनके पगारिया, प्रोफेसर अंजुली शर्मा, दिल्ली से विधि प्रोफेसर डॉ. अनुपम झा, लखनऊ से डॉ. अभिषेक तिवारी, संयुक्त निदेशक महिला एवं बाल विकास निदेशालाय भोपाल डॉ. एसके शर्मा, डॉ. मोना पुरोहित आदि शामिल हुए।
विधि के क्षेत्र में क्लीनिकल एजुकेशन जरूरी
भोपाल से आए कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस सूर्य प्रकाश ने क्लीनिकल लीगल एजुकेशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में व्यवहारिक और तकनीकी जानकारी जोडकऱ कौशल पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज के समय में वकीलों के क्षेत्र में बहद जरूरी बदलाव हो रहे हैं और इसे ध्यान में रखते हुए क्लीनिकल लीगल एजुकेशन की आवश्यकता है। सीएलसी के माध्यम से लोगों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। इस अवसर पर आइटीएम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एसएस भाकर, आइटीएम स्कूल ऑफ लॉ की डीन प्रोफेसर डॉ. शोभा भारद्वाज, एफडीपी संयोजन सचिव असिस्टेंट प्रोफेसर अंकुर श्रोत्रिय, प्रोफेसर डॉ. वीके श्रोत्रिय उपस्थित रहे।
पीडि़त मानवता को न्याय दिलाना क्लीनिकल लीगल एजुकेशन का उद्देश्य
प्रोफेसर डॉ. एमआरके प्रसाद ने कहा कि विधिक सहायता क्लीनिक एक ऐसी सुविधा है, जो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने जिले में स्थापित की जाती है, जिसके द्वारा वकीलों और पैरालीगल स्वयंसेवकों का उपयोग करके नि:शुल्क विधिक सहायता के लिए नि:शुल्क सेवाएं प्रदान करने का काम करती है। इसी के तहत वे क्लीनिक भी काम करते हैं जो लॉ कॉलेज में स्थापित की जाती है। इसका उद्देश पीडि़त मानवता को समय रहते न्याय दिलाना है।
आइटीएम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एसएस भाकर ने लीगल एजुकेशन का उद्देश पीडि़त मानवता को सत्यता की कसौटी पर न्याय दिलाना होता है। वर्तमान समय में विधि को व्यापार के रूप में देखा जा रहा है, यही कारण है कि स्टूडेंट्स डिग्री प्राप्त कर बड़े से बड़ा वकील बनना चाहते हैं, जिनका एक मात्र उद्देश्य रूपये कमाना होता जा रहा है, इस तरह की सोच पूरी तरह गलत होती है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स को विधि का ज्ञान कराने के साथ-साथ समाज कल्याण और पीडि़त मानवता को नि:स्वार्थ भाव से न्याय दिलाने की ओर प्रेरित करना चाहिये। उन्होंने कहा आज मुझे यह बताते हुये गर्व हो रहा है कि आईटीएम यूनिवर्सिटी पीडि़त मानवता के सेवा के लिए देश के भविष्य को तैयार कर रही है।
वास्तविक न्याय शिक्षा में बदलाव की जरूरत
प्रोफेसर डॉ. वीके श्रोत्रिय ने विधि शिक्षा को वास्तविक न्याय शिक्षा में बदलाव की बात कही। उन्होंने कहा कि कक्षा में प्रोफेसर, शिक्षकों को अपने सब्जेक्ट पर कमांड रखनी चाहिए। समय के साथ-साथ पढ़ाई के तरीके में बदलाव लाना चाहिए। कक्षा में इस तरह का वातावरण निर्मित कर अध्यापन कार्य करना चाहिए, जिससे स्टूडेंट्स मानसिक रूप से सशक्त बनकर समाज को न्याय दिलाने के प्रति अग्रसर हों।