
ग्वालियर . जिला न्यायालय के चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह जमरा की अदालत ने आरटीओ कार्यालय में फर्जीवाड़ा और कूट रचना कर टेंपो परमिट हासिल करने के बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने 63 वर्षीय अभियुक्त नरेंद्र सिंह कुशवाह को धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना का दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 18 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। फैसला आते ही न्यायालय ने अभियुक्त के जमानत मुचलके निरस्त कर उसे न्यायिक अभिरक्षा में सीधे जेल भेजने के आदेश दिए। अपर लोक अभियोजक कुलदीप दुबे के अनुसार, अभियुक्त नरेंद्र सिंह कुशवाह आरटीओ कार्यालय में दलाली का कार्य करता था। वर्ष 2013 से 2016 के बीच उसने आरटीओ के सक्षम अधिकारियों को गुमराह कर बेईमानी से परमिट हासिल किए। उसने अपने पिता का असली नाम ( औसान सिंह) छुपाकर अलग-अलग आवेदनों व शपथ पत्रों में पिता का नाम अवधेश सिंह, अंशुमान व हसन सिंह दर्शाया। यही नहीं, जो वाहन (जैसे विक्रम टेंपो क्रमांक एमपी 13 टी 2821) पूर्व में ही बेचे जा चुके थे और जिनके परमिट निरस्त हो चुके थे, उनके स्थान पर झूठे व कूटरचित हलफनामे देकर वाहन क्रमांक एमपी 07 आर 6195 का परमिट प्राप्त कर लिया। बाद में इसी परमिट को लाखों रुपयों में अन्य व्यक्तियों को बेच दिया गया।
ऐसे खुला था फर्जीवाड़ा: लिपिक की शिकायत और हाईकोर्ट का दखल
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा आरटीओ कार्यालय के लिपिक अजय भारद्वाज की शिकायत पर हुआ। विभाग में सीमा से अधिक परमिट जारी होने की जांच के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई थी। शिकायत के बाद मामला हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ पहुंचा, जहां पारित निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में पड़ाव थाना पुलिस ने 2 मार्च 2017 को अभियुक्त के खिलाफ धारा 420, 467 और 468 भादंवि के तहत अपराध दर्ज किया। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरटीओ से संबंधित फाइलें जब्त कीं और भोपाल स्थित एफएसएल से हस्ताक्षरों की जांच कराई। एफएसएल रिपोर्ट में झूठे शपथ पत्रों पर अभियुक्त के ही हस्ताक्षर होने की पुष्टि हुई।