साइबर ठग अब लोगों की बैंकिंग जरूरतों और ऑनलाइन लोन प्रक्रिया का फायदा उठाकर बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला ग्वालियर के मुरार क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को आसान किश्तों पर लोन दिलाने और बाद में एक लोन बंद कराने का झांसा देकर 7 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी कर ली गई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घर बैठे आसान लोन और कम किश्तों का दिया लालच, बैंकिंग डिटेल हासिल कर इंजीनियर को लगाया चूना
ग्वालियर। साइबर ठग अब लोगों की बैंकिंग जरूरतों और ऑनलाइन लोन प्रक्रिया का फायदा उठाकर बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला ग्वालियर के मुरार क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को आसान किश्तों पर लोन दिलाने और बाद में एक लोन बंद कराने का झांसा देकर 7 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी कर ली गई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुरार के त्यागी नगर निवासी विपिन कुमार सिंह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वर्तमान में बैंगलुरु में कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि पिछले साल अगस्त महीने में उन्हें पैसों की आवश्यकता थी। इसी कारण उन्होंने एचडीएफसी बैंक की बारादरी शाखा में लोन के लिए आवेदन किया था। आवेदन करने के बाद उनके मोबाइल पर लगातार कई कॉल आने लगे। कॉल करने वाले खुद को अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का कर्मचारी बताकर लोन प्रक्रिया पूरी कराने की बात कर रहे थे।
इसी दौरान उनके पास दिव्यांशु हंस नाम के व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को आईसीआईसीआई बैंक की लोन शाखा का कर्मचारी बताया। उसने विपिन को भरोसा दिलाया कि वह कम समय में आसान किश्तों पर बेहतर लोन उपलब्ध करा देगा। जालसाज ने इतनी विश्वासपूर्ण तरीके से बात की कि विपिन उसकी बातों में आ गए और उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से उसे भी लोन संबंधी आवेदन और दस्तावेज भेज दिए।
कुछ समय बाद एचडीएफसी बैंक से विपिन का लोन पास हो गया। इसकी जानकारी उन्होंने दिव्यांशु को भी दे दी। इसके बाद ठग ने नई चाल चली। उसने कहा कि भविष्य में किसी भी तरह की बैंकिंग परेशानी से बचने और बेहतर क्रेडिट रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए उन्हें ‘ट्रैक माय लोन’ एप पर अपने दस्तावेज अपलोड करने होंगे। विपिन ने उसकी बात पर भरोसा कर दस्तावेज अपलोड कर दिए। पुलिस का मानना है कि इन्हीं दस्तावेजों और जानकारी के जरिए जालसाज उनकी बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रखता रहा।
इसी बीच आईसीआईसीआई बैंक से भी करीब 24 लाख 92 हजार रुपए का लोन स्वीकृत होकर उनके खाते में पहुंच गया। खाते में बड़ी राशि आते ही जालसाज सक्रिय हो गया। उसने विपिन से संपर्क कर कहा कि दो लोन चालू रहने से भविष्य में दिक्कत हो सकती है, इसलिए एक लोन तुरंत बंद कराना जरूरी है। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कुछ राशि जमा करनी होगी, जो बाद में समायोजित कर दी जाएगी।
जालसाज की बातों में आकर विपिन ने उसके बताए खाते में 7 लाख 9 हजार 740 रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम जमा होते ही आरोपी ने फोन बंद कर लिया और संपर्क खत्म कर दिया। खुद के साथ ठगी होने का अहसास होने पर विपिन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस साइबर सेल की मदद से आरोपी के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंकिंग दस्तावेज साझा न करें और ऑनलाइन लोन संबंधी प्रक्रिया में पूरी सावधानी बरतें।