Scrub Typhus : एमपी में जानलेवा संक्रमण स्क्रब टाइफस का पहला मामला ग्वालियर से सामने आया है। यहां एक 22 वर्षीय युवक में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। फिलहाल, युवक जिला अस्पताल के ICU में भर्ती है।
Scrub Typhus :मध्य प्रदेश में एक जानलेवा बीमारी ने दस्तक द दी है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस जानलेवा बीमारी का नाम स्क्रब टाइफस है। इस जानलेवा संक्रमण का पहला मामला सूबे के ग्वालियर में सामने आया है। बताया जा रहा है कि, एक 22 वर्षीय युवक में पिस्सू से होने वाली बीमारी के लक्षण दिखाई दिए हैं, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दरअसल, शहर के मुरार तिकोनिया में रहने वाले 22 वर्षीय तालिब में स्क्रब टाइफस के लक्षण दिखाई दिए थे। उसने अस्पताल पहुंचकर जांच करवाई, जिसके चलते इस गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई है। युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां मेडिसिन विशेषज्ञ की निगरानी में उसे ICU में रखा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, तालिब को पिछले दिनों तेज बुखार और असहनीय सिर दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके चलते उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन, यहां लगातार उपचार मिलने के बावजूद उसका स्वास्थ्य लगातार खराब होता जा रहा था। ऐसे में स्वजन उसे जिला अस्पताल मुरार लेकर पहुंचे, यहां उसे मेडिसिन आइसीयू में भर्ती कराया गया। शुरुआती लक्षणों के बाद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और वो मल्टी आर्गन फेलियर (शरीर के कई अंगों का काम बंद करना) की स्थिति में पहुंच गया था।
मरीज की गंभीर हालत देखते हुए मेडिसिन विशेषज्ञ डा. मुकेश सिंह तोमर ने लक्षणों का बारीकी से अध्ययन किया। निजी अस्पताल में हुई जांच में स्क्रब टाइफस की पुष्टि होने पर डॉ. तोमर ने उपचार शुरू किया। डॉ. तोमर के अनुसार, इस तरह का ये पहला मामला सामने आया है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि, अगर किसी को तेज बुखार के साथ शरीर पर चतत्ते या अंग कार्य करने में दिक्कत महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। घास वाले क्षेत्रों में जाते समय शरीर को पूरी तरह ढंकने वाले कपड़े पहनें। समय पर एंटीबायोटिक उपचार मिलने से इस जानलेवा बीमारी को मात दी जा सकती है।
मामले को लेकर जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मुकेश सिंह तोमर का कहना है कि, मरीज जब अस्पताल आया तो उसकी स्थिति काफी नाजुक थी। स्क्रब टाइफस एक ऐसी बीमारी है, जिसे अकसर लोग सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज करते हैं, लेकिन ये सीधे लिवर और किडनी पर हमला करती है।
-घास के पशु के कारण ये बीमारी फैलती है। ये लाल रंग के सूक्ष्म कीड़े होते हैं जो लार्वल अवस्था में इंसानों को काटते हैं।
-ये बीमारी मुख्य रूप से घास झाड़ियां और खेतों में रहने वाले कीड़ों से फैलती है।
-तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और त्वचा पर दाने या काले निशान पड़ना इसके मुख्य लक्षण हैं।
-इलाज में देरी होने पर मरीज को पीलिया, लीवर और किडनी फेलियर हो सकता है, जो लास्ट स्टेज पर मल्टी ऑर्गन फैलियर का कारण बनता है।