जेल अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में आखिरी बार 29 साल पहले जबलपुर जेल में फांसी दी गई थी। इसके बाद अदालतों ने कई मामलों में मौत की सजा सुनाई, लेकिन उच्च अदालतों में अपील के दौरान कई सजाएं उम्रकैद में बदल गईं।
ग्वालियर. केंद्रीय जेल में बंद 4 कैदियों को सजा-ए-मौत सुनाई जा चुकी है। इनमें से तीन ने नाबालिग बच्चियों का अपहरण कर उनके साथ दुष्कर्म कर नृशंस हत्या की है, जबकि एक आरोपी को अपनी मां की हत्या के मामले में मौत की सजा मिली है। हालांकि इनके गले में फांसी का फंदा कसने में अभी कई साल लग सकते हैं।
जेल अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में आखिरी बार 29 साल पहले जबलपुर जेल में फांसी दी गई थी। इसके बाद अदालतों ने कई मामलों में मौत की सजा सुनाई, लेकिन उच्च अदालतों में अपील के दौरान कई सजाएं उम्रकैद में बदल गईं। केंद्रीय कारागार में बंद इन चारों दोषियों ने भी हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
14 जुलाई 2018 को शादी में आई 6 साल की बच्ची को अगवा कर कैंसर पहाड़ी ले जाकर दुष्कर्म और हत्या करने के आरोपी जितेंद्र कुशवाह को ट्रायल कोर्ट ने 13 दिन में सुनवाई पूरी कर मौत की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की उम्र को आधार बनाते हुए सजा को 20 साल के कठोर कारावास में बदल दिया।
-कल्ला उर्फ कल्लू राठौर (45), निवासी ग्रेसिम विहार कॉलोनी, ने चार साल पहले हजीरा क्षेत्र में रहने वाली 9 साल की बच्ची को आइसक्रीम का लालच देकर अगवा किया था। रेलवे ट्रैक के पास ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची की हड्डियों में 14 फ्रैक्चर थे और नाक की हड्डी पूरी तरह टूट चुकी थी। इस जघन्य अपराध में स्पेशल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई। वह पिछले चार साल से जेल में है और हाईकोर्ट में अपील कर चुका है।
-विक्रम उर्फ बंटी बरेठा (27), निवासी खिरकारी, सबलगढ़ (मुरैना), को नाबालिग लड़की के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में मुरैना जिला अदालत व स्पेशल कोर्ट ने छह साल पहले मौत की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ उसने भी हाईकोर्ट में अपील की है। जेल रिकॉर्ड के अनुसार, 1 जुलाई 2020 को उसे केंद्रीय कारागार भेजा गया था।
-छत्रपाल सिंह (33), निवासी करेरा (शिवपुरी), को नाबालिग लड़की के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई गई। अन्य दोषियों की तरह उसने भी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है।
केंद्रीय कारागार में इस समय चार बंदी सजा-ए-मौत पाए हुए हैं। इनमें तीन नाबालिग लड़कियों के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामलों में दोषी हैं, जबकि एक आरोपी को मां की हत्या के मामले में फांसी की सजा मिली है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी ने हाईकोर्ट में अपील की है। अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। केंद्रीय जेल में फांसी नहीं दी जाती; मृत्यु-दंड लागू करने के लिए दोषी को जबलपुर जेल भेजा जाता है।
-विदित सिरवैया, जेल अधीक्षक, ग्वालियर