राज्य सरकार ने सर्वे के बाद राहत राशि के लिए भेजा प्रस्ताव आपदा राहत की बकाया किस्तें भी जल्द देने की मांग
ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल में बाढ़ से हुए नुकसान पर राज्य सरकार ने केंद्र को मुआवजा व राहत राशि के लिए फाइनल प्रस्ताव गुरुवार को भेज दिया। इसके तहत मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 2043.19 करोड़ रुपए की मांग की है।
यह राशि आपदा राहत के निर्धारित मापदंडों के आधार पर मांगी गई है, जबकि मैदान में वास्तविक नुकसान इससे ज्यादा माना गया है। अब राज्य का प्रस्ताव जाने के बाद केंद्र से फिर एक सर्वे दल आएगा। यह दल इस प्रस्ताव के आधार पर आकलन करेगा, जिसके ब्राद केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर ही राशि देगी।
728 करोड़ की किस्त मांगी
राज्य सरकार ने आपदा राहत कोष के तहत 728 करोड की किस्त को भी जल्द जारी करने की मांग की है, ताकि मरम्मत कार्य जल्द हो सके। पिछले दिनों ग्वालियर-चंबल में हुई अतिवृष्टि से कई जगह बाढ़ आई थी, प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान हुआ था।
नुकसान और राहत का गणित
राज्य सरकार ने 2043.19 करोड़ का नुकसान आंका है। सबसे ज्यादा नुकसान सिंचाई प्रोजेक्ट के तहत माना गया है। इसमें 427 छोटे और 37 मध्यम और बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट ध्वस्त होना पाया है। एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
इतनी हुआ नुकसान
अंचल में छोटे सिंचाई प्रोजेक्ट बर्बादहुए जिससे 202.11 करोड़ का नुकसान हुआ। मध्यम और बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट में 587.34 करोड़ का नुकसान हुआ। 228.85 किमी ग्रामीण रोड खराब हुआ जिसमें 46.18 करोड़ का नुकसान हुआ। 278 ग्रामीण पुल-पुलिया टूट गए जिससे 35.01करोड़ का नुकसान हुआ। पीडब्ल्यूडी के 480.55 किमी रोड खराब हो गई जिससे 142.64करोड़ का नुकसान हुआ। पीडब्ल्यूडी के 227 पुल टूट गए जिससे 185.21 करोड़ का नुकसान हुआ। 171 किमी शहरी सड़कें भी प्रभावित हो गई जिससे 115.35 करोड़ का नुकसान हुआ। 26 शहरी ब्रिज भी प्रभावित होने से 5.85 करोड़ का नुकसान आंका गया है।
अंचल में शहरीजल परियोजनाएं बर्बाद हो गई इसके लिए 12.78 करोड़ मांगे। 3453 ट्रांसफार्मर खराब हो गए इसके लिए 34.53 करोड़ मांगे। 40 सबस्टेशन के उपकरण खराब हो गए इसके लिए 16.00 करोड़ मांगे। अंचल के 1678 स्कूल भवन भी बरबाद हो गए इसके लिए 36.42 करोड़ मागे। 22 हॉस्टल बिल्डिंग भी बरबाद हो गई इसके लिए 1.74 करोड़ मागे। 176 पंचायत भवन भी प्रभावित हुए इसके लिए 3.11 करोड़ मागे। 1251 आंगनबाड़ी भवन के लिए 25.02 करोड़ और पब्लिक प्रॉपर्टी मरम्मत के लिए 1573 करोड़ रुपए की मांग की है।