
ग्वालियर. नई शिक्षा नीति (एनइपी) के तहत बदलाव तो लागू कर दिए गए, लेकिन नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नौवीं कक्षा के कई छात्र आवश्यक पुस्तकों से वंचित हैं। एनइपी के तहत नौवीं में सोशल साइंस को अनिवार्य बनाया गया है, लेकिन सीबीएसई और एनसीइआरटी अब तक इसकी सभी पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं करा पाए हैं। वहीं, एमपी बोर्ड की कुछ पुस्तकें भी बाजार में नहीं मिल रही हैं। ऐसे में प्रदेश ही नहीं, देशभर के छात्र और अभिभावक किताबों का इंतजार कर रहे हैं। पाटनकर बाजार के पुस्तक विक्रेता घनश्याम दास अग्रवाल ने बताया कि इस बार पुस्तक आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित है। सोशल साइंस के दोनों भाग अप्रेल में आने थे, लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं हुए हैं। इसके अलावा गणित (मैथ्स) का दूसरा भाग भी बाजार में नहीं आया है। उनका कहना है कि सोशल साइंस के भाग-2 में कुछ अध्यायों और कोर्ट से जुड़े विवाद के कारण प्रकाशन प्रभावित हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते भी पुस्तक का प्रकाशन अटका हुआ है।
एमपी बोर्ड की किताबों का
भी संकट
एमपी बोर्ड की नौवीं कक्षा (अंग्रेजी माध्यम) की नई पुस्तकों का पर्याप्त स्टॉक अब तक नहीं पहुंचा है। सत्र की शुरुआत में कुछ पुस्तकें आई थीं, लेकिन उनके बाद नई आपूर्ति नहीं हुई। इसके कारण करीब 30 प्रतिशत छात्र अब भी किताबों से वंचित हैं। वहीं सातवीं कक्षा की हिंदी और अंग्रेजी की पुस्तकें भी बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
फर्जी किताबों का बढ़ा खतरा
जानकारी के अनुसार किताबों की कमी का फायदा उठाकर इंटरनेट पर फर्जी और पायरेटेड पुस्तकों की भी बिक्री शुरू हो गई है। इसे देखते हुए एनसीइआरटी ने चेतावनी जारी की है। बोर्ड के अनुसार, नौवीं कक्षा की सोशल साइंस भाग-1 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी, इंडिया एंड बियॉन्ड' के नाम से इंटरनेट पर अनधिकृत प्रतियां उपलब्ध कराई जा रही
हैं। इस अनधिकृत प्रतियोंं से छात्रों और शिक्षकों को सावधान रहने की जरूरत है।
पुराने नोट्स से पढ़ाई
पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षक पुराने नोट्स और पूर्व पाठ्यक्रम के आधार पर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। छात्र भी असमंजस में हैं कि मुख्य परीक्षा की तैयारी किस पाठ्यक्रम के अनुसार करें। पुस्तक खरीदने आए अभिभावक देवेंद्र गोयल ने बताया कि वे पिछले एक महीने से नौवीं कक्षा की सोशल साइंस की पुस्तक के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक किताब नहीं मिली।
& मेरा बेटा चौथी कक्षा में पढ़ता है, लेकिन उसकी एनसीइआरटी की हिंदी की पुस्तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। पुस्तक विक्रेता ने बताया कि किताब आने में एक सप्ताह लगेगा। किताब नहीं मिलने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रशांत शर्मा, विनयनगर सेक्टर-3
& यह सही है कि किताबें बाजार में नहीं मिल पा रही हैं। फिलहाल पोर्टल से पुस्तकें डाउनलोड कर काम चलाया जा रहा है। पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार यही समस्या बनी हुई है। इससे बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी परेशान हैं।
विनय झालानी, संरक्षक, ग्वालियर सहोदय कॉम्प्लैक्स