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जय विलास पैलेस से मुंबई के समुद्र महल, अरब सागर तक फैली हैं सिंधिया राजवंश की प्रॉपर्टी, किसकी लगी नजर!

Scindia Royal Family Property: ट्रस्टों में बंद है सिंधिया राजवंश की अकूत दौलत, आजादी के बाद से ही अपनों के बीच जारी है कानूनी जंग। राजमाता विजयाराजे सिंधिया से शुरू हुआ विवाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच तक जारी
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Scindia Royal Family Property Span

Scindia Royal Family Property Span: सिंधिया राजवंश की अकूत दौलत का विवादजल्द सुलझेगा। (photo: patrika creative)

Scindia Royal Family Property: सिंधिया राजपरिवार का इतिहास साल 1731 से शुरू होता है। राजघराने ने मध्य भारत में 217 साल तक राज किया। पहले मराठा साम्राज्य में सेनापति के रूप में और बाद में अंग्रेजों के दौर में। इन दो सदियों से ज्यादा के शासनकाल में सिंधिया परिवार ने देश-विदेश में चल-अचल संपत्तियां, नामी कंपनियों के शेयर्स और बड़े व्यावसायिक संस्थानों के रूप में अकूत दौलत खड़ी की।

अकूत दौलत पर लगी किसकी नजर?

आजादी के बाद इसी दौलत पर अपनों की नजर लग गई। सबसे पहले राजमाता विजयाराजे सिंधिया से संपत्ति का जो विवाद शुरू हुआ, वह पीढ़ियों से गुजरता हुआ आज बुआओं और भतीजे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहा है।

संपत्ति का बड़ा और मुख्य हिस्सा ट्स्टों के पास सुरक्षित

संपत्ति का बड़ा और मुख्य हिस्सा आज भी सिंधिया परिवार के विभिन्न ट्रस्टों के पास सुरक्षित है, जिसकी असल कीमत का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। आजादी के बाद राज परिवारों के विलीनीकरण के समय भारत सरकार ने एक सहमति पत्र साइन किया था, जिसमें इन सभी संपत्तियों का बकायदा लिखित उल्लेख है।

मायानगरी मुंबई और बैरकपुर तक अरबों का रियल एस्टेट निवेश

● दादर (मुंबई) 9162 वर्ग गज क्षेत्र, जिसमें कई वीआइपी दुकानें और आवासीय इमारतें शामिल हैं।

● धोबी तालाब मार्केट 2672 वर्ग गज क्षेत्र, जिसमें प्राइम लोकेशन के रहने के मकान और दुकानें हैं।

● घोरुपदेव 40213 वर्ग गज का विशाल क्षेत्र, जिसमें तीन चालें और अन्य कमर्शियल संरचनाएं हैं।

● गवालिया टैंक रोड 7597 वर्ग गज में फैली बहुमंजिला आलीशान इमारत।

● बैलाड एस्टेट मुंबई के पॉश बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में स्थित प्रसिद्ध 'वेकफील्ड हाउस' इमारत।

● बैरकपुर की संपत्तियां पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में रिवर साइड और मिडल रोड इलाके पर स्थित कई महत्वपूर्ण कैंटोनमेंट प्लॉट और रणनीतिक जमीनें।

● चर्चगेट (उषाकिरण) चर्चगेट के ठीक सामने स्थित उषाकिरण (पूर्व नाम विंस्टन हाउस), जो गैरेज सहित एक 4 मंजिला आलीशान इमारत है।

● पेडर रोड (माउंट पेटिट) 'माउंट पेटिट' नाम का ऐतिहासिक बंगला और अस्तबल, जो 24393 वर्ग गज में फैला है।

● ऊंटी की संपत्तियां बल्फोर लॉज और बल्फोर कॉटेज, एल्क हिल लॉज, ग्रासमेरे हाउस, पार्कफील्ड हाउस

● वर्ली (समुद्र महल) अरब सागर के सामने स्थित प्रसिद्ध समुद्र महल परिसर। इसके साथ ही मेसर्स दादाजी धाकजी एंड कंपनी और मिस्टर एफ. केर को लीज पर दी गई करोड़ों की जमीनें।

● नारायण दाभोलकर रोड 1363 वर्ग गज में फैला अति-विशिष्ट बंगला और मोटर गैरेज।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत: देश के प्रमुख तीर्थ में फैली हैं छतरियां और मंदिर

● सिंधिया राजवंश ने केवल महलों का निर्माण नहीं कराया, बल्कि देश के कई पवित्र शहरों में धार्मिक संपत्तियां और ट्रस्ट भी स्थापित किए।

ग्वालियर व शिवपुरी: छतरी बाजार (लश्कर) में स्थित ऐतिहासिक छतरियां, मंदिर और बगीचे। लश्कर में ही विठ्ठल मंदिर (पिछाड़ी), रखुमाबाई साहिबा मंदिर, कोटेश्वर और भूतेश्वर मंदिर। शिवपुरी में महाराजा माधवराव और जीजा महाराज की भव्य छतरियां और उनके परिसर की कीमती जमीनें।

● उज्जैन में प्रसिद्ध द्वारकाधीश और मदन मोहन मंदिर। इसके अलावा इलाहाबाद (प्रयागराज), काशी (गंगा महल, बालाजी), वृंदावन, मथुरा, पुष्कर, अयोध्या और पूना (वानवड़ी छतरी) में स्थित कई संस्थान, ऐतिहासिक मंदिर और धर्मशालाएं आज भी इसी विरासत का हिस्सा हैं।

ग्वालियर व बाहर की संपत्तियां

जय विलास पैलेस में बंगले, आउट हाउस, कार्यालय, अस्तबल, गैरेज आदि शामिल हैं। साख्या विलास परिसर और बगीचे के साथ. सुसेरा कोठी परिसर के साथ. कुलेथ कोठी. कॉटेज हिल टेकनपुर रिट्रीटपरिसर के साथ, माधव विलास पैलेस

शिवपुरी: परिसर और आउट-हाउस के साथ, हैप्पी विला शिवपुरी, जॉर्ज कैसल शिवपुरी, कालीयादेह पैलेस

उज्जैन: आस-पास की जमीन और घरों के साथ, दिल्ली कोठी 37, राजपुर रोड और नई दिल्ली में स्थित जमीन का प्लॉट, (पद्माविलास)

पूना: परिसर और आउट-हाउस के साथ, आगरा कोठी नं. 62., पडोन कोठी

झांसी: 34 बीघा 10 बिस्वा जमीन और तीन पक्के कुओं के साथ, वकालत हाउस

इंदौर: सिंधिया घाट, बनारस, विठोबा मंदिर, सांक्यलिम गोवा आदि संपत्तियां शामिल हैं।