ग्वालियर

शहर में शराब दुकानों की नीलामी अटकी, 30-60 फीसदी कम बोली पर सरकार असमंजस में

आखिरी तारीख गुजरने के बाद भी चार दुकानों पर फैसला नहीं
2 min read
• •
Updated: 2 Apr 2026, 6:57 PM IST
शहर में शराब दुकानों की नीलामी अटकी, 30-60 फीसदी कम बोली पर सरकार असमंजस में
शहर में शराब दुकानों की नीलामी अटकी, 30-60 फीसदी कम बोली पर सरकार असमंजस में

ग्वालियर. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया आखिरी तारीख गुजरने के बाद भी अधर में लटकी हुई है। 31 मार्च की डेडलाइन खत्म हो चुकी है, लेकिन शहर की चार प्रमुख दुकानों को लेकर सरकार अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। रिजर्व प्राइस से 30 से 60 फीसदी तक कम बोली लगने के बावजूद प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा कि इन दुकानों को आवंटित किया जाए या फिर नई नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाए।
मंगलवार रात तक चली बोली प्रक्रिया में एमएलबी रोड, लधेड़ी, सीपी कॉलोनी और मोहना की दुकानों पर ठेकेदारों ने बेहद कम रुचि दिखाई। हालात ऐसे रहे कि आखिरी समय में बोली तो लगी, लेकिन वह भी रिजर्व प्राइस से काफी नीचे रही। इससे आबकारी विभाग और सरकार दोनों असमंजस की स्थिति में हैं। दरअसल, पिछले वित्तीय वर्ष में यही दुकानें रिजर्व प्राइस से अधिक दर पर नीलाम हुई थीं। इस बार विभाग ने बेस प्राइस में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी कर दी, जिससे ठेकेदार पीछे हट गए। सूत्रों के अनुसार, कई ठेकेदारों ने आपसी समझ बनाकर इन दुकानों पर बोली नहीं लगाई, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। बाद में विभाग ने दबाव में आकर रिजर्व प्राइस कम किया, लेकिन तब भी अपेक्षित प्रतिस्पर्धा नहीं मिल सकी। आखिरी दिन यानी 31 मार्च को ठेकेदारों ने 30 से 60 फीसदी कम दरों पर बोली लगाई। अब सरकार के सामने दो विकल्प हैं या तो घाटे में इन दुकानों का आवंटन किया जाए या दोबारा नीलामी कराई जाए।

कीमत से कम दर पर शराब बेची
इधर, नीलामी प्रक्रिया के बीच बाजार में अनियमितताओं की भी तस्वीर सामने आई। जिन दुकानों का नवीनीकरण नहीं हुआ, वहां ठेकेदारों ने निर्धारित कीमत से कम दर पर शराब बेची। सुबह से लेकर देर रात तक सस्ती शराब की बिक्री जारी रही, लेकिन आबकारी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।

Updated on:
2 Apr 2026, 6:57 PM IST
Published on: