ग्वालियर. फाल्गुन मास की शुरूआत 2 फरवरी से हो गई है, यह 03 मार्च तक रहेगा। फाल्गुन हिंदू पंचांग का बारहवां और अंतिम महीना है, जो भक्ति, उल्लास और रंगों से भरा होता है। यह माह विशेष रूप से भगवान शिव, श्रीहरि विष्णु, राधा-कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की आराधना के लिए पवित्र माना जाता है। […]
ग्वालियर. फाल्गुन मास की शुरूआत 2 फरवरी से हो गई है, यह 03 मार्च तक रहेगा। फाल्गुन हिंदू पंचांग का बारहवां और अंतिम महीना है, जो भक्ति, उल्लास और रंगों से भरा होता है। यह माह विशेष रूप से भगवान शिव, श्रीहरि विष्णु, राधा-कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की आराधना के लिए पवित्र माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस माह के बाद हिंदू नववर्ष का आगमन होता है। इसे फागुन का महीना भी कहा जाता है। इस मास में महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्यों के लिए भी यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में भगवान शिव की आराधना और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख और समृद्धि की वृद्धि होती है। ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि फाल्गुन मास की समाप्ति पर ङ्क्षहदी नव वर्ष की शुरुआत होती है। यह महीना भक्ति, साधना और पुण्य कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
शिवलिंग पर रूद्राभिषेक, कृष्ण भजन से मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा
इस महीने प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान शिव के लिए व्रत रखें। इस माह की पूर्णिमा तिथि को चंद्र देव के दर्शन करते हुए चंद्रमा के मंत्रों का उच्चारण करें। यह महीना शिव को विशेष प्रिय होता है। इसलिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए। इस माह में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
कब तक रहेगा फाल्गुन मास
माघ मास की पूर्णिमा के अगले दिन से फाल्गुन मास की शुरुआत होती है और फाल्गुन मास के बाद ङ्क्षहदू नववर्ष प्रारंभ होता है। यह मास 02 फरवरी से शुरू हुआ और यह 03 मार्च को समाप्त होगा। इसमें होली के 8 दिन पहले से लगने वाला होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ होगा।
सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ
फाल्गुन के महीने में सफेद वस्तुओं का दान करना बेहद शुभ माना गया है। सफेद फूल, दही, शंख, चीनी, चावल, सफेद चंदन और सफेद कपड़े आदि का दान कर सकते हैं।
फाल्गुन में पड़ेंगे ये व्रत और त्योहार
-05 फरवरी - द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
-08 फरवरी - शबरी जयंती
-09 फरवरी - जानकी जयंती
-13 फरवरी - विजया एकादशी
-14 फरवरी - शनि प्रदोष व्रत