ग्वालियर

ग्वालियर…. पांच प्लेटफॉर्म, रैंप सिर्फ एक: बाकी पर सीढिय़ां बिरला नगर स्टेशन पर बुजुर्ग और दिव्यांग रोज हो रहे परेशान

रेलवे खुद को हाईटेक बनाने और स्टेशनों को अमृत काल में चमकाने के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत देखनी हो तो बिरला नगर स्टेशन आ जाइए। यहां रेलवे की ऐसी गजब ...
2 min read
Jun 23, 2026
gwalior plateforme
gwalior plateforme

ग्वालियर. रेलवे खुद को हाईटेक बनाने और स्टेशनों को अमृत काल में चमकाने के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत देखनी हो तो बिरला नगर स्टेशन आ जाइए। यहां रेलवे की ऐसी गजब इंजीनियङ्क्षरग देखने को मिलेगी कि आप भी सिर पकड़ लेंगे। रोजाना हजारों यात्रियों के दबाव वाले इस स्टेशन पर कुल 5 प्लेटफार्म हैं, लेकिन कमाल की बात यह है कि रैंप सिर्फ एक ही प्लेटफार्म पर बनाया गया है। नतीजा बुजुर्ग, दिव्यांग और गंभीर मरीज आज भी यहां सीढिय़ों के भरोसे घिसटने को मजबूर हैं।

चढऩे को रैंप, उतरने के लिए सिर्फ सीढिय़ां

रेलवे के इस अजीबो गरीब इंतजाम का खामियाजा उन व्हीलचेयर वाले मरीजों या बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है, जो गलती से एक तरफ बने रैंप के सहारे ऊपर फुटओवर ब्रिज तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाना होता है, वहां रैंप गायब मिलता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या बुजुर्ग या दिव्यांग फुटओवर ब्रिज से नीचे कूदकर जाएंगे? मजबूरी में उनके परिजनों को उन्हें गोद में उठाकर या सीढिय़ों से उतारना पड़ता है। वहीं अगर कोई यात्री दूसरे प्लेटफॉर्म से आ रहा है, तो उसे ऊपर चढने के लिए रैंप नसीब ही नहीं होता।

हर दिन हजारों यात्रियों की आवाजाही

बिरला नगर ही ऐसा स्टेशन है जहां से 14 से ज्यादा ट्रेनों का संचालन और हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद आधुनिक सुविधाओं के नाम पर यह स्टेशन ’ शून्य ’ है। यहां न तो बुजुर्गों के लिए एस्केलेटर हैं और न ही लिफ्ट की व्यवस्था। यात्रियों का कहना है कि जब रेलवे करोड़ों का राजस्व वसूलता है, तो बुनियादी सुविधाएं देने में इतनी कंजूसी क्यों? जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं और जनता हर दिन दर्दभरा सफर तय करने को अभिशप्त है।

इनका कहना है

बिरला नगर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म एक को छोडकऱ अन्य प्लेटफार्म की लंबाई और चौड़ाई कम है। इसलिए रैंप बनाना अभी तकनीकी रूप से संभव नहीं है। भविष्य में चौड़ीकरण के चलते रैंप बनाया जा सकता है।
शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ उत्तर मध्य रेलवे

Updated on:
23 Jun 2026 06:14 pm
Published on:
23 Jun 2026 06:02 pm