हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर बेटी की शादी के लिए पिता गैस एजेंसी के चक्कर काट रहा है, वहीं दूसरी ओर नाश्ता सेंटरों, होटलों और फैक्ट्रियों में कमर्शियल सिलेंडरों की धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है
ग्वालियर. शहर में शादियों का सीजन चल रहा है, लेकिन खुशियों के इस माहौल में आम आदमी के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत बड़ी मुसीबत बन गई है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर बेटी की शादी के लिए पिता गैस एजेंसी के चक्कर काट रहा है, वहीं दूसरी ओर नाश्ता सेंटरों, होटलों और फैक्ट्रियों में कमर्शियल सिलेंडरों की धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है। इस पूरे खेल में ’ब्लैक’ (कालाबाजारी) का एंगल भी खुलकर सामने आने लगा है, क्योंकि एक संकट के बीच चोकलेट फैक्ट्री में 77 सिरेंडर मिले जाने के मामले ने एजेंसे किए गए वितरण पर सवाल खड़े किए हैं।
एजेंसियों और बड़े प्रतिष्ठानों के बीच ‘सांठगांठ’
एक तरफ आम जनता नियमों की कतार में खड़ी है, तो दूसरी तरफ शहर के नाश्ता सेंटरों, चाय की थडिय़ों और छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों में कमर्शियल सिलेंडरों की कोई कमी नहीं दिख रही। इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मांग के अनुसार पर्याप्त सिलेंडर मिल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसियों और बड़े प्रतिष्ठानों के बीच ’सांठगांठ’ के चलते यह भेदभाव हो रहा है। संकट के बीच इन दुकानों पर सिलेंडर देखे गए। जबकि गैस कंपनियों के स्टॉक में सिलेंडर निल थे।
77 सिलेंडर एक साथ मिलने से मचा हडक़ंप, ब्लैक का शक गहराया
< सिलेंडर के इस खेल में कालाबाजारी का संदेह तब और गहरा गया, जब हाल ही में एक ही स्थान पर 77 कमर्शियल सिलेंडर बरामद हुए। संदेह के घेरे में एजेंसियां: इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर एक ही जगह कैसे पहुंचे?
< फिलहाल विभागीय स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है।
&सिलेंडर जब्त हैं। फैक्ट्री संचालक व गैस एजेंसी को नोटिस जारी किए जाएंगे। ये अपने दस्तावेज पेश करेंगे, उसके बाद निष्कर्ष निकालेंगे।
अरविदं भदौरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक