
ग्वालियर. ग्वालियर व्यापार मेले की तारीख तय है, तैयारियों की कवायद भी शुरू हो चुकी है, लेकिन मेले का सबसे अहम हिसाब-किताब अभी फाइलों में ही अटका नजर आ रहा है। वर्ष 2026-27 का ग्वालियर व्यापार मेला 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक लगाया जाना है। मेले की तैयारियों से पहले होने वाली ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण की बोर्ड बैठक अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मेले का बजट कैसे तय होगा और आय-व्यय की पूरी तस्वीर बोर्ड के सामने कब आएगी? खास बात यह है कि इस बार ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी हो चुकी है। इसके बावजूद बोर्ड बैठक की तारीख तय नहीं हो पाई है। जबकि पिछले साल 2025-26 के मेले की तैयारियों के लिए 4 जुलाई 2025 को प्राधिकरण की 47वीं बोर्ड बैठक आयोजित कर ली गई थी। यानी इस बार बैठक को लेकर पहले ही काफी देरी हो चुकी है।
इसलिए अहम होती है बोर्ड बैठक
ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण की ओर से हर साल मेला शुरू होने से पहले बोर्ड बैठक आयोजित की जाती रही है। इस बैठक में पिछले मेले के आय-व्यय का लेखा-जोखा रखा जाता है और आगामी मेले का प्रस्तावित बजट भी सामने आता है। मेले में किस मद में कितना खर्च किया जाना है, किन व्यवस्थाओं पर कितना बजट लगेगा और आय के संभावित स्रोत क्या होंगे, इन सभी बिंदुओं पर चर्चा होती है। बोर्ड बैठक में प्राधिकरण से जुड़े करीब 12 सदस्य मौजूद रहते हैं। ऐसे में बैठक केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मेले की वित्तीय और प्रशासनिक तैयारियों को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।
तारीख तय, लेकिन बजट का इंतजार
मेले के आयोजन की तारीख नजदीक आती जा रही है और तैयारियों का सिलसिला भी आगे बढऩा है। ऐसे में बोर्ड बैठक नहीं होने से सबसे बड़ा सवाल बजट को लेकर खड़ा हो रहा है। पिछले साल जहां जुलाई में ही बैठक कर आय-व्यय और आगामी मेले की तैयारियों पर चर्चा हो गई थी, वहीं इस बार अब तक तस्वीर साफ नहीं है।
बोर्ड बैठक की क्या जरूरत है?
व्यापार मेले की तैयारियां जारी हैं। जहां तक बोर्ड बैठक की बात है तो इसकी क्या जरूरत है? हम अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव को ही तो सबकुछ तय करना है।