ग्वालियर

समन्वय और कर्तव्य पालन से ही समस्याओं का समाधान: जोशी

भैयाजी जोशी ने कहा कि महिला और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों की भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन दोनों का महत्व समान है। भारतीय परंपरा में भी मातृशक्ति को परिवार और समाज में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने समानता और एकरूपता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वभाव और भूमिकाओं में भिन्नता होने का अर्थ असमानता नहीं है।
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एलएनआइपीई के रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में आयोजित व्याख्यान का विषय ‘सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक एवं संवर्धक मातृशक्ति’ था।

ग्वालियर. समाज में विविधता के कारण मतभेद और समस्याएं स्वाभाविक हैं, लेकिन समन्वय, सह-अस्तित्व, कर्तव्य पालन और नैतिक मूल्यों के जरिए इनके समाधान की राह निकाली जा सकती है। समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच सम्मान, सुरक्षा और सहभागिता का भाव जरूरी है। जब व्यक्ति अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करता है तो कई समस्याएं उत्पन्न होने से पहले ही समाप्त हो जाती हैं। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैयाजी जोशी ने शुक्रवार को राष्ट्रोत्थान न्यास की ज्ञान प्रबोधिनी व्याख्यान माला में कही। एलएनआइपीई के रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में आयोजित व्याख्यान का विषय ‘सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक एवं संवर्धक मातृशक्ति’ था। जोशी ने कहा कि समाज अनेक घटकों से मिलकर बनता है और प्रत्येक घटक की अपनी उपयोगिता होती है। जिस प्रकार शरीर का हर अंग महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार समाज में भी अलग-अलग भूमिकाओं और विचारों वाले लोगों का महत्व है। समाज और राष्ट्र का हित तभी संभव है, जब इन सभी के बीच समरसता और समन्वय का भाव हो।

महिला-पुरुष की भूमिका अलग, महत्व समान

भैयाजी जोशी ने कहा कि महिला और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों की भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन दोनों का महत्व समान है। भारतीय परंपरा में भी मातृशक्ति को परिवार और समाज में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने समानता और एकरूपता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वभाव और भूमिकाओं में भिन्नता होने का अर्थ असमानता नहीं है। भिन्नताओं के बावजूद परस्पर सम्मान और सहयोग का भाव बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शोषण और भेदभाव से मुक्त वातावरण ही समाज के समग्र विकास का आधार बन सकता है। इसके लिए केवल व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार और सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन जरूरी है। परिवार से मिलने वाले संस्कार और व्यक्ति का आचरण समाज के वातावरण को प्रभावित करते हैं।

शिक्षा और संस्कार को मजबूत करने पर जोर

जोशी ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए शिक्षा, संस्कार और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को मजबूत करना होगा। व्यक्ति के व्यवहार का प्रभाव केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर व्यापक सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझकर उनका ईमानदारी से पालन करे तो अनेक ऐसी परिस्थितियां पैदा ही नहीं होंगी, जो बाद में सामाजिक समस्या का रूप लेती हैं। उन्होंने सामाजिक जीवन में अधिकारों के साथ कर्तव्यों के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार समाज में केवल अपेक्षाओं के आधार पर व्यवस्था नहीं चल सकती। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए दूसरों के अधिकारों और सम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए।

सामाजिक चेतना का केंद्र है राष्ट्रोत्थान न्यास

कार्यक्रम की प्रस्तावना में राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष डॉ. जगजीत सिंह नामधारी ने कहा कि न्यास सामाजिक चेतना के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। न्यास की ओर से चिकित्सा केंद्र और योग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सामाजिक समरसता, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीयता से जुड़े विषयों पर साहित्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम में संघ के ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी और राष्ट्रोत्थान न्यास अध्यक्ष डॉ. जगजीत सिंह नामधारी मंचासीन रहे। माधवी सिंह तोमर ने अतिथियों का परिचय दिया। स्वागत प्रियंका कुशवाह और सुमन सिकरवार ने किया। निधि मिश्रा ने व्यक्तिगत गीत प्रस्तुत किया। संचालन अंजलि भार्गव ने किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक वंदेमातरम् गान के साथ हुआ।

Updated on:
26 Sept 2026 10:49 pm
Published on:
26 Sept 2026 10:49 pm