ग्वालियर

Gwalior news: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाइकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, छोटे भाई को मिलेगी नौकरी !

Highcourt news: हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति मामले में फैसला दिया कि एक आश्रित का आवेदन खारिज होने से दूसरे पात्र आश्रित का दावा खत्म नहीं होता।
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Highcourt news: अनुकंपा नियुक्ति पर फैसला (Photo Source - Patrika)
Highcourt news: अनुकंपा नियुक्ति पर फैसला (Photo Source - Patrika)

Gwalior news: हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट में किया है कि परिवार के एक आश्रित का आवेदन खारिज होने का मतलब यह नहीं हैकि दूसरे पात्र आश्रित का दावा भी खत्म हो जाए। कोर्ट ने मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की रिट अपील खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन पर 2016 की पॉलिसी के तहत विचार करने के निर्देश दिए है। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य संकट में आए परिवार को आजीविका का सहारा देना है। ऐसे मामलों में विभागों को तकनीकी और अड़ियल रवैया अपनाने के बजाय वास्तविक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

ये है मामला

बिजली कंपनी में पदस्थ सहायक लाइनमैन की 28 मार्च 2016 को मृत्यु हो गई थी। बड़े बेटे ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन चतुर्थ श्रेणी पद की योग्यता न होने पर फरवरी 2017 में कंपनी ने आवेदन खारिज कर 1 लाख रुपये अनुग्रह राशि की पेशकश की, जिसे परिवार ने ठुकरा दिया। इसके बाद 12वीं, आईटीआई और बीए पास छोटे बेटे ओम प्रकाश लिखार ने क्लास-3 (टेस्टिंग असिस्टेंट) पद के लिए आवेदन किया। कंपनी ने नई पॉलिसी (2018) और बड़े भाई का केस खारिज होने का हवाला देकर उसका आवेदन भी निरस्त कर दिया। बेंच ने मृत्यु दिनांक की पॉलिसी के तहत विचार करने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ बिजली कंपनी ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी।

विभाग परिवार को सही सलाह दे

कोर्ट ने कहा कि अगर पहला आवेदक योग्यता पूरी नहीं करता, तो सक्षम अधिकारी का दायित्व है कि वह केस बंद करने के बजाय परिवार को बुलाकर दूसरे पात्र सदस्य से आवेदन कराने की सलाह दे। परिवार केवल एक ही नियुक्ति मांगता है। इसलिए एक आश्रित की जगह दूसरे का नाम आना नया दावा नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने दोहराया कि कर्मचारी की मृत्यु की तिथि तय होती है, जबकि नीतियां बदलती रहती हैं। इसलिए मृत्यु के समय लागू नियम ही प्रभावी होंगे।

खारिज कर दी अपील

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दिव्यांग कर्मचारी के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य शासन की रिट अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी को नियुक्ति के समय ही विशेष परिस्थितियों में नियमों और शर्तों से छूट दी गई हो, तो बाद में टाइपिंग परीक्षा पास नहीं करने के आधार पर उसकी वार्षिक वेतनवृद्धि रोकना उचित नहीं है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कर्मचारी को इंक्रीमेंट का लाभदेने के निर्देश दिए गए थे।

Updated on:
23 Aug 2026 01:31 pm
Published on:
23 Aug 2026 01:30 pm