Electricity bill: उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने मोटर की क्षमता की जांच के निर्देश दिए, लेकिन कंपनी ने जांच नहीं कराई।
Electricity bill: अतिरिक्त विद्युत लोड के आरोप से जुड़े 20 वर्ष पुराने मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 52 हजार 592 रुपए का अतिरिक्त बिल निरस्त कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल लोड अधिक होने का आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे रेकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर सिद्ध करना बिजली कंपनी की जिम्मेदारी है। साक्ष्य के अभाव में 12 अप्रेल 2005 को जारी मांग आदेश को न्यायालय ने खारिज कर दिया।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता संजय जैन महाराजपुरा औद्योगिक क्षेत्र में फूड प्रोडक्ट्स उद्योग संचालित करते हैं। उनके प्रतिष्ठान पर 25 एचपी का स्वीकृत विद्युत लोड था। 2 अप्रेल 2005 को किए निरीक्षण में 40 एचपी लोड उपयोग का आरोप लगाते हुए 52,592 रुपए की अतिरिक्त मांग जारी की गई। याचिकाकर्ता ने 2006 में इस कार्रवाई को चुनौती दी।
उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने मोटर की क्षमता की जांच के निर्देश दिए, लेकिन कंपनी ने जांच नहीं कराई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, ग्वालियर से जांच कराई, जिसमें वास्तविक लोड 15 एचपी मिला। 24 जनवरी 2006 के पुन: निरीक्षण में कुल लोड 20 एचपी 30 वॉट दर्ज हुआ, जो स्वीकृत सीमा से कम था। अदालत ने अतिरिक्त बिल को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया और जमा 20 हजार रुपए समायोजित करने के निर्देश दिए।
वहीं जबलपुर शहर में बिजली उपभोक्ताओं को अनाप-शनाप बिल से राहत नहीं मिल पा रही है। कभी खपत से अधिक राशि के बिल भेजे जा रहे हैं तो कहीं औसत बिल से उपभोक्ता परेशान हैं। इसका खुलासा मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिटी सर्किल की ओर से जारी आंकड़ों से हुआ है। आंकड़ों के अनुसार अप्रेल 2025 से फरवरी 2026 तक शहर के पांचों संभागों में कुल 17,558 शिकायतें दर्ज हुईं।
अधिकारियों का कहना है कि सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया है। हालांकि उनका दावा है कि यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में कम है। संभागवार आंकड़ों के अनुसार दक्षिण संभाग में सर्वाधिक 6,342 शिकायतें दर्ज हुईं। उत्तर संभाग में 2,933, पूर्व संभाग में 2,792, विजय नगर संभाग में 2,784 और पश्चिम संभाग में 2,727 शिकायतें प्राप्त हुईं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिल में गड़बड़ी की शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं होता। कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कुछ मामलों में निराकरण में चार महीने लग जाते हैं, जिससे बिल और सरचार्ज का बोझ बढ़ जाता है।
अप्रेल 2024 से फरवरी 2025 तक सिटी सर्किल में 29,328 शिकायतें दर्ज हुई। अधिकारियों का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिल की शिकायतों में कमी आई है। अधिकांश शिकायतें उन उपभोक्ताओं की हैं, जिनके घर में स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं।
अप्रेल 2025 से अब तक बिल से संबंधित 17,558 शिकायतें हुई हैं। ये अप्रेल 2024 से फरवरी 2025 की तुलना में कम हैं। स्मार्ट मीटर लगने के बाद शिकायतों में कमी आई है। - संजय अरोरा, अधीक्षण अभियंता