ग्वालियर

टेसू के फूलों से महकेगी 12 राज्यों की होली : ग्वालियर की मीनाक्षी ने पलाश से घोला सेहत वाला रंग

जब फागुन की बयार चलती है, तो प्रकृति खुद को पलाश के केसरिया रंगों से सजा लेती है। लेकिन इस बार ग्वालियर के पलाश की यह रंगत सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरहदों को पार कर सात समंदर पार तक पहुंच रही है। ग्वालियर के सराफा बाजार की मीनाक्षी नागर ने अपनी मेहनत […]

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सिंगापुर से लेकर अमेरिका तक बिखरेगी ग्वालियर के गुलाल की लाली, केमिकल को मात दे रही है 'केसरिया पोटली'

जब फागुन की बयार चलती है, तो प्रकृति खुद को पलाश के केसरिया रंगों से सजा लेती है। लेकिन इस बार ग्वालियर के पलाश की यह रंगत सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरहदों को पार कर सात समंदर पार तक पहुंच रही है। ग्वालियर के सराफा बाजार की मीनाक्षी नागर ने अपनी मेहनत और नवाचार से केमिकल वाली होली के डर को खुशियों वाली होली में बदल दिया है।
होली पर पलाश के फूल जिसे आम बोल चाल में टेसू कहते हैं, उससे बने रंगों का अपना अलग ही महत्व है। टेसू से बना रंग किसी तरह का नुकसान तो करता ही नहीं है, बल्कि इससे त्वचा निखर उठती है। केमिकल्स वाले कलर्स में मौजूद तत्त एलर्जी के साथ स्किन और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं, यही वजह है कि प्राकृतिक रंग-गुलाल की मांग अब काफी अधिक होने लगी है। ग्वालियर के सराफा बाजार की मीनाक्षी नागर पलाश के केसरिया फूलों की पोटली के साथ नेचुरल गुलाल को तैयार कर रही हैं। ये गुलाल अरारोट और खाद्य रंगों के मेल से बनाई हुई। खास बात यह है कि दिसंबर से अब तक देश के 12 राज्यों में 3 टन से अधिक इन प्राकृतिक रंगों को भेज चुकी हैं। आगे दो टन रंग और भेजने वाली हैं।

ऐसी है पलाश के फूलों की पोटली
पलाश के फूल की इस पोटली में 50 ग्राम फूल रहते हैं। इन्हें इकट्ठा करने के बाद सुखाया जाता है। इसे उपयोग करने का तरीका भी आसान है। 8 लीटर पानी को उबालने के बाद उसमें पोटली को डिप करने के बाद पानी का रंग केसरिया होता है। पलाश के फूलों की ये पोटली 65 रुपए की है। बदलते मौसम में पलाश के इन फूलों से बनी पोटली से होली खेलने से स्किन को भी राहत मिलेगी।

आगे 2 टन प्राकृतिक-रंग और भेजेंगी
मीनाक्षी नागर ने बताया कि पलाश के फूल और अरारोट मिलाकर हर्बल गुलाल तैयार किया है। इसके साथ ही खाने के रंग और अरारोट मिलाकर भी गुलाल बनाया है। गुलाल के ये पैकेट केसरिया, गुलाबी, लाल, पीला और हरा रंग में बनाए गए हैं। दिसंबर माह से इन्हें बनाना शुरू कर दिया था, आगे 2 टन रंग-गुलाल बाहर भेजे जाने हैं। अभी तक कैथल (हरियाणा), जमशेदपुर, लखनऊ, नोएडा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, यवतमाल, नागपुर, वाराणसी, बैंगलुरु, हैदराबाद, दुर्ग, बिलासपुर, रायपुर, मुंबई सहित सिंगापुर और यूएसए भी इन प्राकृतिक रंगों को भेज चुकी हैं। हर्बल गुलाल के ये पैकेट 100 ग्राम 50 रुपए के हैं। उन्होंने आगे बताया कि मैं ये काम 2020 से कर रही हूं।

Updated on:
18 Feb 2026 11:21 am
Published on:
18 Feb 2026 11:20 am
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