17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमवाय मेमोरियल ट्रॉफी में ग्वालियर लगातार चौथी बार खिताबी दौड़ से बाहर

ग्वालियर डिवीजन छोटे जिलों की टीमों से भी हार रही

2 min read
Google source verification
एमवाय मेमोरियल ट्रॉफी जीतने का सपना ग्वालियर डिवीजन टीम का लगातार चौथी बार टूट गया।

कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम

ग्वालियर. एमवाय मेमोरियल ट्रॉफी जीतने का सपना ग्वालियर डिवीजन टीम का लगातार चौथी बार टूट गया। वर्ष 2021-22 में उपविजेता रहने के बाद से टीम फाइनल की दौड़ तक भी नहीं पहुंच सकी है। इस बार 2025-26 सत्र में भी प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा और टीम अंक तालिका में आठवें स्थान पर सिमट गई।
चार मैचों के अभियान में ग्वालियर को दो मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा, एक मैच में जीत मिली, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा। कुल सात अंक जुटा सकी टीम खिताबी दौड़ से काफी दूर नजर आई। खास बात यह रही कि अपेक्षाकृत छोटे माने जाने वाले डिवीजनों की टीमें भी ग्वालियर से बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहीं। अंक तालिका में नर्मदापुरम, शहडोल, उज्जैन और सागर जैसी टीमें ग्वालियर से ऊपर रहीं। यह स्थिति टीम प्रबंधन और क्रिकेट प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
ग्वालियर डिवीजन कभी इस ट्रॉफी में मजबूत दावेदार माना जाता था, लेकिन पिछले चार सत्रों से टीम की निरंतर गिरावट साफ दिखाई दे रही है। बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी और गेंदबाजी में धार का अभाव टीम की कमजोरी साबित हुआ। क्रिकेट जानकारों का मानना है, यदि चयन प्रक्रिया, फिटनेस और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्वालियर की वापसी और मुश्किल हो सकती है।
टीम में बाहर के खिलाड़ी खिलाने का दांव फेल
ग्वालियर डिवीजन टीम ने इस सत्र में बाहरी खिलाड़ी पर दांव खेलते हुए पूर्व अंतरराष्ट्रीय स्पिनर नरेन्द्र हिरवारी के बेटे मिहिर हिरवानी को टीम में शामिल किया। उम्मीद थी कि उनका अनुभव और पारिवारिक क्रिकेट विरासत टीम के प्रदर्शन में मजबूती लाएगी, लेकिन मैदान पर इसका खास असर दिखाई नहीं दिया। मिहिर हिरवानी से जिस प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही थी, वह पूरी नहीं हो सकी। न तो गेंदबाजी में निर्णायक धार दिखी और न ही टीम को अहम मौकों पर बढ़त मिल पाई। ऐसे में बाहरी खिलाड़ी पर लगाया गया दांव ग्वालियर के लिए लाभकारी साबित नहीं हुआ।
चयन प्रक्रिया पर सवाल, शहर के खिलाडिय़ों को मौका नहीं
ग्वालियर डिवीजन टीम के चयन को लेकर क्रिकेट सवाल उठने लगे हैं। शहर के प्रतिभावान खिलाडिय़ों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे। इसका उदाहरण हिमांशु शिंदे हैं, जो ग्वालियर के खिलाड़ी होते हुए भी नर्मदापुरम डिवीजन से खेल रहे हैं। खास बात यह रही कि उन्होंने ग्वालियर के खिलाफ मुकाबले में दोहरा शतक जडकऱ अपनी प्रतिभा साबित की। ऐसे में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्थानीय खिलाडिय़ों की अनदेखी की जा रही है और नए खिलाडिय़ों को मौका नहीं दिया जा रहा है। कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनका प्रदर्शन लगातार खराब रहा है, लेकिन वे भी टीम में स्थान बनाए हुए हैं।