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रेलवे के हेरिटेज संग्रहालय का किया जा रहा कायाकल्प, नैरोगेज को मिलेगा विशेष स्थान

ग्वालियर. रेलवे के हेरिटेज संग्रहालय का कायाकल्प करने की तैयारी की जा रही है। संग्रहालय की दीवारों की मरम्मत की जा रही है और इसके विभिन्न हिस्सों को पुनर्निर्मित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यहां की पत्थर की बिङ्क्षल्डग को भी चमकाया जा रहा है, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार रहे […]

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संग्रहालय

ग्वालियर. रेलवे के हेरिटेज संग्रहालय का कायाकल्प करने की तैयारी की जा रही है। संग्रहालय की दीवारों की मरम्मत की जा रही है और इसके विभिन्न हिस्सों को पुनर्निर्मित किया जा रहा है। खास बात यह है कि यहां की पत्थर की बिङ्क्षल्डग को भी चमकाया जा रहा है, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार रहे और आने वाली पीढ़ियों को इस धरोहर का अनुभव मिल सके। वर्षों तक उचित देखरेख नहीं होने से संग्रहालय की दीवारें खराब हो चुकी हैं और उसके कुछ हिस्से टूट-फूट गए हैं। लेकिन अब इस ऐतिहासिक धरोहर के कायाकल्प के लिए काम शुरू हो चुका है। इसमें आकर्षक लाइङ्क्षटग भी लगाई जाएगी। जिससे रात के समय भी लोग दूर से इसे देख सकेंगे।

रेलवे के इतिहास को संजोए है संग्रहालय

यह संग्रहालय रेलवे के इतिहास और उसकी धरोहर धरोहर को संजोए हुए है। इसमें न केवल रेलवे के विकास को प्रदर्शित करतीं अनमोल वस्तुएं हैं, बल्कि ग्वालियर के इतिहास और संस्कृति से भी जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजें रखी गई हैं। यहां रेलवे के पुराने इंजन, ट्रेनों के मॉडल, टिकट, और रेलवे से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावे•ा संग्रहित किए गए हैं। यहां मौजूद प्रत्येक वस्तु रेलवे के विकास की कहानी कहती है।

जीर्णोंद्धार के बाद नहीं हुआ शुरू

इस संग्रहालय का जीर्णोंद्धार तीन साल पहले किया गया था, लेकिन इसके बाद भी इसे आम जनता के लिए नहीं खोला गया। जिससे पर्यटक निराश होकर लौट रहे थे। अब, इस संग्रहालय के खुलने की उम्मीद जागी है

नैरोगेज का ग्वालियर में पुराना इतिहास

संग्रहालय में रेलवे की नैरोगेज ट्रेनों को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि नैरोगेज ट्रेनों का ग्वालियर में काफी पुराना इतिहास रहा है। इन ट्रेनों की खासियत यह थी कि इनकी पटरी का आकार सामान्य गेज की तुलना में छोटा होता था, और यह क्षेत्रीय परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। अब इन ट्रेनों को एक विशेष धरोहर के रूप में संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा, ताकि लोग इस विशेष गेज और उसके उपयोग के बारे में अधिक जान सकें।
नंदी शुक्ला, एडीआरएम झांसी