ग्वालियर. कहते हैं, सच्ची दुआ और उम्मीद कभी बेकार नहीं जाती। भोपाल के कोलार निवासी बद्रीनाथ की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहां नौ वर्षों का इंतजार आखिरकार एक सुकून भरी सुबह में बदल गया। यह सिर्फ एक गुमशुदा व्यक्ति की घर वापसी नहीं, बल्कि मानवता, तकनीक और युवाओं की संवेदनशीलता की जीत की कहानी है।
जनवरी में कड़ाके की ठंड भरी सुबह, जब ग्वालियर का हजीरा इलाका कोहरे में डूबा था। सुबह करीब चार बजे सेवा साथी आयुष गोस्वामी की नजर एक शख्स पर पड़ी, जो महज दो कपड़ों में ठंड से कांप रहा था। वह बद्रीनाथ थे—सुध-बुध खो चुके, असहाय और अकेले। आयुष ने बिना समय गंवाए उन्हें सहारा दिया और आश्रम स्वर्ग सदन पहुंचाया, जहां से बद्रीनाथ के जीवन को नई दिशा मिली।