शहर में भटकते मानसिक रूप से दिव्यांगजनों के लिए बना स्वर्ग सदन अब सिर्फ आश्रय स्थल नहीं, बल्कि बिछड़े परिवारों को मिलाने की मजबूत कड़ी भी बन रहा है.....
ग्वालियर. शहर में भटकते मानसिक रूप से दिव्यांगजनों के लिए बना स्वर्ग सदन अब सिर्फ आश्रय स्थल नहीं, बल्कि बिछड़े परिवारों को मिलाने की मजबूत कड़ी भी बन रहा है। इसकी सबसे भावुक मिसाल उस वक्त सामने आई, जब आधार कार्ड की प्रक्रिया ने एक ऐसे व्यक्ति को उसके परिवार से मिला दिया, जिसे परिजन वर्षों पहले मृत मान चुके थे।स्वर्ग सदन में पिछले पांच साल से रह रहे एक दिव्यांगजन का जब आधार कार्ड बनवाया जा रहा था, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर उसका नाम और पता उभर आया-पप्पू रैकवार, निवासी दबोह। यह जानकारी मिलते ही स्वर्ग सदन की टीम हरकत में आई और परिजनों से संपर्क किया गया। 2021 में गायब होने के बाद परिजनों ने पप्पू की तलाश की थी, लेकिन वह परिजनों को नहीं मिला था।
फिर मिली जिंदगी
परिवार को जब बताया गया कि पप्पू जीवित है, तो वे स्तब्ध रह गए। दरअसल जून 2021 में पप्पू को इलाज के लिए मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराया गया था, जहां से वह अचानक लापता हो गया। महीनों की तलाश के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने उसे मृत मान लिया और त्रयोदशी तक कर दी।
कलेक्टर को कहा धन्यवाद, भावुक हुआ परिवार
आधार कार्ड से पहचान सामने आने के बाद पप्पू का परिवार उसे लेने स्वर्ग सदन पहुंचा। परिजनों ने कलेक्टर रुचिका चौहान से मुलाकात कर इस पहल के लिए भावुक शब्दों में आभार जताया। परिवार का कहना था कि अगर आधार नहीं बनता, तो शायद पप्पू से मिलना कभी संभव नहीं होता।
स्वर्ग सदन बन रहा टूटे रिश्तों की डोर : स्वर्ग सदन प्रशासन की यह पहल साबित कर रही है कि तकनीक और संवेदनशीलता जब साथ आती है, तो खोई हुई जिंदगियां फिर से अपने अपनों तक लौट सकती हैं।
ऐसे हुई पहचान
ठ्ठ आधार कार्ड बनाते समय आंखों की फोटो और उंगलियों के निशान लिए गए
ठ्ठ बायोमेट्रिक मिलान से पुराने रिकॉर्ड सिस्टम में सामने आए
ठ्ठ नाम पप्पू रैकवार और पता दबोह दर्ज मिला
ठ्ठ रिकॉर्ड में उपलब्ध मोबाइल नंबर से परिजनों से संपर्क हुआ
ठ्ठ परिजनों को पप्पू के जीवित होने की जानकारी दी गई