- 70 फीसदी शादियों पर महंगाई की मार, बाजार के रुख का सीजन पर असर
- सिर्फ निवेशक बाजार में दिख रहे, शादी वाले घरों में बढ़ी बेचैनी
पत्रिका पड़ताल
ग्वालियर. सहालग का मौसम एक बार फिर दस्तक देने जा रहा है। 4 फरवरी से शहर में विवाह मुहूर्त शुरू होते ही मैरिज गार्डन, बैंड-बाजे और ढोल की थाप से माहौल गुलजार होगा, लेकिन इस बार शहनाई की मिठास पर सोना-चांदी की महंगाई भारी पड़ती नजर आ रही है। लगातार बढ़ते दामों ने शादी वाले घरों का बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। हालात यह हैं कि गहनों के वजन में 40 से 50 फीसदी तक कटौती करनी पड़ रही है और कई परिवार जुगाड़ के सहारे शादी निपटा रहे हैं। जानकारों की मानें तो 70 फीसदी शादियों पर बाजार का असर देखने को मिल रहा है।
बजट बिगड़ा, गहनों की चमक हुई फीकी
बीते कुछ महीनों में सोने और चांदी के दामों में आई तेज उछाल ने मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। जहां पहले शादी में हार, कंगन, झुमके, पायल और चूड़ियां सामान्य मानी जाती थीं, अब वही गहने सबसे बड़ा खर्च बन गए हैं।
बड़ागांव निवासी देवेंद्र गोयल बताते हैं कि बेटी की शादी के लिए सालभर पहले पूरा बजट तय किया था। तब सोचा था कि सभी जरूरी गहने बनवा लेंगे, लेकिन अब हालात यह हैं कि आधे गहनों में ही बजट खत्म हो रहा है। ऐसे हालात शहर के अधिकांश परिवारों के हैं। पहले जहां 25 से 30 ग्राम सोना सामान्य माना जाता था, अब लोग 10 से 15 ग्राम में ही काम चलाने को मजबूर हैं।
बदला बाजार का मिजाज, 18-20-21 कैरेट की बढ़ी मांग
सोने के लगातार बढ़ते दामों का असर सराफा बाजार की पसंद पर भी साफ दिख रहा है। अब लोग 22 कैरेट की जगह 18, 20 और 21 कैरेट गोल्ड के गहनों की ओर रुख कर रहे हैं। सराफा कारोबारियों का कहना है कि 21 कैरेट गोल्ड की चमक और क्वालिटी 24 कैरेट जैसी होती है, जबकि कीमत में करीब 8 हजार रुपए तक की बचत हो जाती है। यही वजह है कि इस समय 70 से 80 फीसदी डिमांड इन्हीं कैरेट के गहनों की है।
महंगाई में निकले नए जुगाड़, ये ट्रेंड में
महंगे सोना-चांदी के बीच लोग नए विकल्प तलाश रहे हैं।
हल्के वजन के गहने: भारी हार और चूड़ियों की जगह मिनिमल डिजाइन पसंद किए जा रहे हैं। पुराने गहनों की री-डिजाइनिंग: मां-दादी के पुराने गहनों को गलाकर नए डिजाइन बनवाए जा रहे हैं।
आर्टिफिशियल ज्वेलरी का चलन: रिसेप्शन जैसे कार्यक्रमों में असली चांदी की जगह आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनी जा रही है।
किराए की ज्वेलरी: पहली बार किराए पर गहने लेने का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है।
सहालग में भी ठंडी पड़ी खरीदारी
सोना-चांदी व्यवसाय संघ लश्कर के अध्यक्ष पुरुषोत्तम जैन का कहना है कि आमतौर पर सहालग से पहले ही बाजार में गहनों की अच्छी मांग निकल जाती है, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। गहनों की बिक्री 10 फीसदी से भी कम रह गई है। बाजार में सिर्फ निवेशक ही नजर आ रहे हैं।
उपनगर ग्वालियर सराफा संघ के अध्यक्ष जवाहर जैन बताते हैं कि इस सीजन में भारी सेट लगभग नहीं बिक रहे हैं। हल्के वजन के हार, चेन और मंगलसूत्र की ही मांग बची है।
ऐसे रिवर्स गियर मारा सोना-चांदी ने
(प्रति 10 ग्राम सोना, प्रति किलो चांदी – जीएसटी अतिरिक्त)