
नए चमचमाते अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) से सोमवार से बसों का संचालन तो शुरू होने जा रहा है, लेकिन दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बनने वाला है। स्मार्ट सिटी और जिला प्रशासन जिस आईएसबीटी को शहर की सबसे बड़ी सौगात बता रहा था, उसका उद्घाटन केवल एक कन्फ्यूजन का ट्रायल बनकर रह गया है। सच तो यह है कि आज से न तो पुराना बस स्टैंड पूरी तरह बंद हो रहा है और न ही नया आईएसबीटी पूरी तरह शुरू हो पा रहा है। अगर आप सोच रहे हैं कि नई आलीशान बिल्डिंग से आपको तुरंत बस मिल जाएगी, तो ठहरिए मध्यप्रदेश ट्रांसपोर्ट महासंघ के अध्यक्ष के अनुसार, रूट की पूरी प्लानिंग को एक अजीब फॉर्मूले में तब्दील कर दिया गया है
यात्री ध्यान दें: भिंड-मुरैना की बसें रेलवे स्टेशन से ही मिलेंगी
लोकल व सामान्य बसें: सुबह के समय भिंड, मुरैना और अन्य नजदीकी रूटों की सामान्य यात्री बसें हमेशा की तरह रेलवे स्टेशन स्थित पुराने बस स्टैंड से ही चलेंगी।
सिर्फ 5 मिनट का स्टॉपेज: ये बसें रेलवे स्टेशन से सवारी भरकर सीधे आईएसबीटी पहुंचेंगी और वहां केवल 5 मिनट रुककर आगे रवाना हो जाएंगी। यही नियम लौटते समय भी लागू होगा।
लग्जरी और वीडियो कोच: केवल शाम को चलने वाली लग्जरी और वीडियो कोच बसें ही सीधे आईएसबीटी से अपने गंतव्य के लिए रवाना होंगी।
प्रशासन अगले 15 दिनों तक इस अजीबोगरीब व्यवस्था का ट्रायल करके आउटपुट देखेगा, जिसकी मार सिर्फ और सिर्फ आम जनता पर पड़ने वाली है।
परिवहन की कोई व्यवस्था नहीं: यात्री भगवान भरोसे
न ऑटो-टेंपो, न ई-बस: शहर से आईएसबीटी रूट के लिए न तो कोई परमिट जारी हुए हैं, न ऑटो-टेंपो की लाइन लगी है और न ही ई-बस सेवा शुरू हो पाई है।
किराया भी तय नहीं: सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि शहर से नए बस स्टैंड तक जाने का किराया ढांचा तक तय नहीं किया गया है।
ऐसे में यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और रात के समय बाहर से आने वाले मुसाफिरों को भारी लूटखसोट का सामना करना पड़ेगा। वे मनमाने दामों पर निजी वाहनों या प्राइवेट ऑटो-टैक्सी चालकों के रहमोकरम पर निर्भर रहने को मजबूर होंगे।
तैयारियों के नाम पर सिर्फ लीपापोती
सोमवार से शुरू होने वाले इस चुनौतीपूर्ण संचालन को देखते हुए आईएसबीटी के संधारण और मरम्मत का ठेका लेने वाली कंपनी ने आनन-फानन में महज 4-5 सुरक्षा गार्ड (पुरुष और महिला) तैनात किए हैं। इतने विशाल टर्मिनल के लिए क्या 4-5 गार्ड काफी हैं। वहीं, आनन-फानन में बस स्टैंड के पास साफ-सफाई की गई है, कुछ संकेतक बोर्ड (साइनबोर्ड) टांगे गए हैं और मुख्य गेट पर डामर की पक्की सड़क बनाकर कोरम पूरा कर लिया गया है। बिना किसी ठोस कनेक्टिविटी और सुरक्षा इंतजामों के इतने बड़े प्रोजेक्ट को चालू करना प्रशासन की अदूरदर्शिता को साफ बयां करता है।
सुबह की सामान्य बसें रेलवे स्टेशन स्थित बस स्टैंड से चलेंगी और आईएसबीटी पहुंचकर करीब पांच मिनट रुकने के बाद भिण्ड-मुरैना सहित अन्य स्थानों के लिए रवाना होंगी। वापसी में भी यही व्यवस्था रहेगी। वीडियो कोच बसें शाम को आईएसबीटी से संचालित होंगी।15 दिन तक ट्रायल के बाद देखा जाएगा कि व्यवस्था का क्या परिणाम आता है।
बलवीर सिंह तोमर अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ट्रांसपोर्ट महासंघ