
Illegal arms trade: अवैध हथियारों के धंधे में ग्वालियर नंबर-1 (Photo Source - Patrika)
Illegal arms trade: कंधे पर लाइसेंसी बंदूक और मूंछों पर ताव देना कभी चंबल अंचल का पुराना रसूख माना जाता था लेकिन अब वक्त के साथ तस्वीर बेहद खौफनाक तरीके से बदल चुकी है। हथियारों की हनक का यह चस्का अब एमपी के ग्वालियर के गली-मोहल्लों में अवैध तमंचों और पिस्टल के रूप में पैर पसार चुका है। इसी जानलेवा शौक के चलते ग्वालियर अवैध हथियारों के धंधे और इस्तेमाल में पूरे मध्य प्रदेश में नंबर-1 बन गया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट भी इस पर मुहर लगा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में सबसे ज्यादा अवैध हथियारों के केस ग्वालियर पुलिस के खाते में दर्ज हुए हैं। यह आंकड़ा तो केवल उन अपराधियों का है जो पकड़े गए, जबकि जो पुलिस की नजरों से दूर है, उनका कोई हिसाब ही नहीं है। प्रदेश में सबसे ज्यादा अवैध हथियार के 227 केस ग्वालियर में पुलिस के खाते आए हैं।
हथियार तस्करों का शहर और देहात में देसी, पिस्टल तमंचे ठिकाने पर पहुंचाने का नेटवर्क है। पेशेवर अपराधियों के अलावा युवाओं में इन हथियारों को थमाने का क्रेज बढ़ा तो हथियार तस्कर ऑनलाइन बुकिंग और हथियारों की होम डिलेवरी तक कर रहे हैं।
2 जून की रात थाटीपुर में दो नंबर पिस्टल से हनक दिखाने का शौक बेटे की छठी के दूसरे दिन ज्योति कुशवाह की जान ले गया। ज्योति के देवर योगेश ने भतीजे की छठी में रसूख जमाने के लिए दो नंबर की पिस्टल लाया था। कार्यक्रम में योगेश ने दनादन हर्ष फायर किए लेकिन उसका फितूर नहीं उतरा दूसरे दिन उसने पिस्टल की मैग्जीन को खाली समझ कर ज्योति पर पिस्टल तानकर ट्रिगर दबा दिया।
पिस्टल के चेंबर में कारतूस था मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों की गोली ज्योति को लग गई उसकी नजर में ऐसी वारदातों की लंबी फेरहिस्त है जिनमें दो अवैध हथियारों से रसूख दिखाने के शौक ने युवाओं को अपराधी बनाया है। पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग में इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाटसएप स्टेटस पर हथियारों के फोटो, वीडियो अपलोड़ करने में कई युवाओं को राउंडअप किया।
तमंचाः 5 से 7 हजार रुपए ऑन डिमांड
देसी पिस्टलः 15 से 25 हजार रुपए-ठिकाने पर डिलेवरी
कारतूसः 300 से 500 रुपए-अवैध हथियार की टेस्टिंग के लिए फ्री
राकेश सिन्हा, रिटायर्ड सीएसपी का कहना है कि ग्वालियर में अवैध हथियार पकड़ने की गिनती इसलिए ज्यादा है क्योंकि प्रदेश में सबसे ज्यादा अवैध पिस्टल और तमंचे की खपत भी यहीं हैं। यहां हथियार का चस्का बरसों पुराना है। ग्वालियर, चंबल में लाइसेंसी हथियारों की गिनती का ग्राफ भी काफी ज्यादा है। अब हथियारों के लाइसेंस आसानी से नहीं मिल रहे हैं इसलिए अवैध हथियारों का धंधा बढ़ा है।
इसके अलावा यहां वर्चस्व दिखाने के लिए हथियारों को जरिया बनाया जाता है। कुछ साल पहले तक लोग लाइसेंसी बंदूकों को भी अपराधों के लिए किराए पर देते थे। अवैध पिस्टल और तमंचे बनाने का काम खंडवा और खरगोन के सिकलीगर करते हैं पुलिस को पता है। अवैध हथियारों का धंधा रोकना है तो दो नंबरी पिस्टल और तमंचे बनाने वालों के ठिकाने से लेकर खरीदने वालों तक की जड़ खोदना पड़ेगी, केवल पैडलर्स को पकड़ने से धंधा नहीं रुकेगा।
Updated on:
16 Jun 2026 01:58 pm
Published on:
16 Jun 2026 12:46 pm
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
