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Gwalior news: 357 किमी. दूर से आती नशे की खेप, फोन पर बुकिंग, ठिकाने पर होती डिलेवरी, गिरफ्तार

Online supply of drugs: मोबाइल रिपेयरिंग की आड़ में गांजा तस्करी करते सूरज श्रीवास्तव गिरफ्तार, पूछताछ में दिल्ली से ओजी, एमडीएमए, कोकीन व पिंक नशे की ऑनलाइन सप्लाई का खुलासा।
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Online supply of drugs: दिल्ली से आती नशे की खेप (Photo Source - AI)

Online supply of drugs: दिल्ली से आती नशे की खेप (Photo Source - AI)

Gwalior news:एमपी के ग्वालियर शहर में मोबाइल रिपेयरिंग की आड़ में गांजा तस्करी में पकड़े गए सूरज श्रीवास्तव ने पूछताछ में शहर में ओजी, एमडीएमए, कोकीन और पिंक नशे की ऑनलाइन सप्लाई का खुलासा किया है। उसके मुताबिक इनकी खेप दिल्ली से आती है और युवाओं में इनकी डिमांड ज्यादा है। पुलिस ने सूरज को बैजाताल से किलो 8 ग्राम गांजे के साथ पकड़ा था। सोमवार को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

महंगे नशे की शहर में डिमांड

पुलिस के अनुसार पूछताछ में शहर में महंगे नशे की बढ़ती डिमांड और युवाओं के इसकी गिरफ्त में होने की बात सामने आई है। सूरज से जुड़े मोबाइल फोन की जांच में नशा कारोबार से संबंधित कई जानकारियां मिली हैं। पुलिस इन्हें खंगालकर नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है। ललितपुर कॉलोनी निवासी सूरज ने जेल जान से पहले पूछताछ में बताया कि वह सिर्फ डिलीवरी का काम करता है, जबकि असली खिलाड़ी पर्दे के पीछे हैं। उसने मुरार और लश्कर के कुछ रसूखदारों के नाम भी बताए है।

पुलिस के मुताबिक, ग्राहक दिल्ली के सप्लायर को ऑनलाइन ऑर्डर देते हैं और खेप सूरज तक पहुंचती है। इसके बाद वह तय ठिकाने पर डिलीवरी करता था। उसे प्रत्येक डिलीवरी के 2.5 हजार रुपए कमीशन मिलते थे। खुद नशे का आदी होने के कारण वह खेप में से थोड़ा नशा निकालकर इस्तेमाल करता था।

साथियों की तलाश, बड़े रैकेट का खुलासा होगा

पड़ाव थाना टीआइ शैलेन्द्र भार्गव ने बताया कि आरोपी के मोबाइल से नशा कारोबार से जुड़ी कई जानकारियां मिली हैं। उसे दो दिन की रिमांड पर लिया गया था। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

संगत में बहके कदम

बीते दिनों पहले ही भोपाल शहर में पढ़ाई के लिए भोपाल आई अंकिता की मुलाकात रीवा की रहने वाली आरोही से हुई। नए शहर में दोनों एक-दूसरे का सहारा बन गईं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा और दोनों साथ रहने लगीं। लेकिन कुछ महीनों बाद हालात बदलने लगे। आरोही पहले से ही एक नशा तस्करी नेटवर्क के संपर्क में थी। पहले अंकिता को सिर्फ साथ चलने के लिए कहा गया, फिर एक दिन उसे एक बैग पकड़ाया गया और धीरे-धीरे वही बैग उसकी जिम्मेदारी बन गया। इस तरह वह अनजाने में इस नेटवर्क का हिस्सा बनती चली गई।