जीवाजी विश्वविद्यालय में सुरक्षा व मैनपावर का काम अनियमितता के घेरे में है। पिछले 10 साल से एक ही एजेंसी को विश्वविद्यालय प्रशासन एक्सटेंशन दे रहा है। नए टेंडर की प्रक्रिया को फाइलों में दाब दिया है। इस पूरे मामले को लेकर लोकायुक्त में शिकायत की गई है। विधि छात्र जय प्रकाश मौर्य ने विस्तृत […]
जीवाजी विश्वविद्यालय में सुरक्षा व मैनपावर का काम अनियमितता के घेरे में है। पिछले 10 साल से एक ही एजेंसी को विश्वविद्यालय प्रशासन एक्सटेंशन दे रहा है। नए टेंडर की प्रक्रिया को फाइलों में दाब दिया है। इस पूरे मामले को लेकर लोकायुक्त में शिकायत की गई है। विधि छात्र जय प्रकाश मौर्य ने विस्तृत आवेदन देकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2015 से 2025 तक विश्वविद्यालय में शर्मा सिक्योरिटी एजेंसी को बिना नियमित टेंडर प्रक्रिया के ठेका दिया जाता रहा है। हाल ही में पत्रिका ने सुरक्षा व मैनवापर के ठेके में की जा रही गडबड़ी को लेकर खबर प्रकाशित की थी।
शिकायत में कहा गया है कि एजेंसी को बार-बार एक्सटेंशन दिया गया, जबकि निजी सुरक्षा एजेंसी विनियमन अधिनियम 2005 के तहत लाइसेंस, पुलिस वेरिफिकेशन, प्रशिक्षण और वार्षिक नवीनीकरण अनिवार्य है। आरोप है कि सुरक्षा गार्डों के वेतन, पीएफ और ईएसआई में भी अनियमितताएं हुईं। करोड़ों रुपये का भुगतान होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में रही। वर्ष 2015 से 2025 तक किए गए समस्त भुगतानों, ऑडिट रिपोर्ट, लाइसेंस और नियुक्त अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। शिकायतकर्ता ने एजेंसी के जयप्रकाश राजौरिया, लक्ष्मी , संबंधित कुलपतियों, कुलसचिवों और एजेंसी संचालकों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
चार कंपनियां तैयार, पर फैसला अटका
मैनपावर व सिक्योरिटी के लिए विश्वविद्यालय ने टेंडर निकाला था। इसमें चार कंपनियों ने आवेदन किया है, लेकिन फाइनल बिड नहीं खोली है। फाइल इधर से उधर घूम रही है। इस कारण वर्तमान एजेंसी को काम मिल रहा है।
- जेयू में रह साल मैनपावर व सुरक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। किसके यहां कितने गार्ड लगे हैं। इसका भी हिसाब नहीं रखा जा रहा है। परिसर सुरक्षा गार्ड होने के बाद भी अव्यवस्था है। आए दिन विवाद हो रहे हैं।
- आवारा कुत्तों का भी परिसर में आतंक बढ़ गया है। आए दिन परिसर में घूमने जाने वाले आम लोग व छात्रों पर हमला कर रहे हैं।
- खेल मैदान की जालियां तोड़ दी गई हैं। परिसर में पड़ी सूखी लकडिय़ां भी चोरी हो रही हैं। दीवार से सडक़ की ओर लकड़ी फेंक रहे हैं।
इनका कहना है
- नौ महीने पहले टेंडर निकाले गए थे। नया ठेका देना प्रक्रिया में है। स्टोर प्रभारी छुट्टी पर है। इनके आने के बाद प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राजीव मिश्रा, कुलसचिव जेयू