
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 2006 से लंबित द्वितीय अपील में बड़ा फैसला सुनाते हुए अशोकनगर स्थित मंदिर श्री गणेशजी की कृषि भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार घोषित कर दिया। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने निचली अदालतों के फैसलों को पलटते हुए मंदिर की जमीन को राज्य के माफी औकाफ विभाग की संपत्ति माना और पुजारी के निजी स्वामित्व के दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने घोषित किया कि मंदिर और उसकी संपत्ति राज्य सरकार में निहित है और कलेक्टर मंदिर का प्रबंधक होगा, जो पुजारी की नियुक्ति कर सकेगा।
मामला लगभग 42 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि का था, जो शाडोरा, नागौखेड़ी और पिपरौल गांवों में स्थित है। मंदिर की 35.003 हेक्टेयर जमीन शाडोरा में, 4.922 हेक्टेयर नागौखेड़ी में और 2.790 हेक्टेयर पिपरौल में है।मंदिर की ओर से भालचंद्र राव ने स्वयं को पुजारी और प्रबंधक बताते हुए दावा किया था कि मंदिर और उससे जुड़ी जमीन उनके पूर्वजों को लगभग 200 वर्ष पूर्व उत्तराधिकार के आधार पर प्रदान की गई थी, इसलिए यह निजी मंदिर है। निचली अदालतों ने उनके पक्ष में निर्णय दिया था। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि मंदिर की संपत्ति देवता की होती है, पुजारी मात्र सेवक होता है। रिकॉर्ड में भूमि माफी औकाफ विभाग के नाम दर्ज थी और पुजारी को मालिक नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि देवता एक विधिक इकाई है और संपत्ति उसी की होती है, पुजारी को स्वामित्व अधिकार प्राप्त नहीं होते। अदालत ने पाया कि उत्तराधिकार आधारित लाइसेंस का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही पुजारी द्वारा मंदिर को निजी संपत्ति बताना देवता के हित के विपरीत है।
कोर्ट ने पूरे मामले को लेकर क्या कहा
-कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू देवता एक कानूनी व्यक्ति है, जो संपत्ति का मालिक होता है। पुजारी या प्रबंधक केवल देवता का सेवक है, जो संपत्ति का प्रबंधन देवता के हित में करता है। कोर्ट ने राम जन्मभूमि केस का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि पुजारी को मंदिर की संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं है। वह केवल पूजा करता है, प्रबंधन नहीं। यदि पुजारी संपत्ति को अपनी निजी बताए, तो यह कुप्रबंधन है और उसे हटाया जा सकता है।
-भालचंद्र राव ने एक पुराना लाइसेंस पेश किया, जो माउदी भाषा में था। कोर्ट ने पाया कि यह लाइसेंस चोरी हुई मूर्ति के बाद नई मूर्ति स्थापित करने का था, न कि वंशानुगत प्रबंधन का। मूल लाइसेंस पेश नहीं किया गया, जबकि वादी ने दावा किया था कि वह उनके पास है।
Published on:
20 Feb 2026 11:06 am
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