ग्वालियर

पुण्य की रोशनी से जगमगाएगा कार्तिक, नदी-स्नान से दीपदान तक हर दिन खास, देव जागेंगे, घर-आंगन में विराजेंगी महालक्ष्मी

आस्था की डुबकी, दीपों की चमक और भगवान विष्णु की आराधना हिंदू धर्म में पुण्य और साधना का विशेष संदेश लेकर कार्तिक मास शुरू हो चुका है। मंगलवार से आरंभ हुए इस पवित्र महीने में मंदिरों से लेकर घरों तक पूजा-पाठ की रौनक रहेगी। कहीं ब्रह्म मुहूर्त में नदी-सरोवरों में स्नान होगा, तो कहीं तुलसी चौरे पर दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। दीपदान, दान-पुण्य और व्रत-उपवास के लिए खास माने जाने वाले इस महीने का समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के साथ होगा।
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Updated: 28 Oct 2026, 11:29 AM IST
आस्था की डुबकी, दीपों की चमक और भगवान विष्णु की आराधना हिंदू धर्म में पुण्य और साधना का विशेष संदेश लेकर कार्तिक मास शुरू हो चुका है। मंगलवार से आरंभ हुए इस पवित्र महीने में मंदिरों से लेकर घरों तक पूजा-पाठ की रौनक रहेगी। कहीं ब्रह्म मुहूर्त में नदी-सरोवरों में स्नान होगा, तो कहीं तुलसी चौरे पर दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। दीपदान, दान-पुण्य और व्रत-उपवास के लिए खास माने जाने वाले इस महीने का समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के साथ होगा।
कार्तिक मास की शुरूआत 27 अक्टूबर से हो चुकी है। इस पवित्र महीने में कई पर्व-त्योहार पडऩे जा रहे हैं।
  • 29 अक्टूबर को करवा चौथ, 8 नवंबर को दीपावली, 10 को गोवर्धन पूजा और 24 नवंबर को देव दीपावली के साथ होगा कार्तिक पर्वों का समापन

ग्वालियर. आस्था की डुबकी, दीपों की चमक और भगवान विष्णु की आराधना हिंदू धर्म में पुण्य और साधना का विशेष संदेश लेकर कार्तिक मास शुरू हो चुका है। मंगलवार से आरंभ हुए इस पवित्र महीने में मंदिरों से लेकर घरों तक पूजा-पाठ की रौनक रहेगी। कहीं ब्रह्म मुहूर्त में नदी-सरोवरों में स्नान होगा, तो कहीं तुलसी चौरे पर दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। दीपदान, दान-पुण्य और व्रत-उपवास के लिए खास माने जाने वाले इस महीने का समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के साथ होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चार महीने के चातुर्मास के बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। देवउठनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। कार्तिक मास को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा से किए गए स्नान, दीपदान, जप और दान से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यही वजह है कि पूरे महीने धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला चलता रहता है।

दीपदान से लेकर तुलसी पूजा तक, हर दिन पुण्य कमाने का अवसर
कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना, मंदिरों में दर्शन करना और जरूरतमंदों को दान देना विशेष महत्व रखता है। पवित्र नदियों और सरोवरों के किनारे दीप जलाने की परंपरा भी इसी महीने से जुड़ी है। घरों में सुबह-शाम तुलसी पूजन और दीप प्रज्ज्वलन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आकाशदीप जलाना, भूमि पर शयन करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना भी इस माह के प्रमुख धार्मिक नियमों में शामिल हैं। इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना के साथ भगवान श्रीकृष्ण और हनुमानजी की पूजा भी की जाती है। हनुमानजी के निमित्त पंचमुखी तेल का दीपक जलाने और पाठ-पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं, प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, अन्नदान और दीपदान करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि जरूरतमंदों को अन्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य मिलता है और कुबेर की कृपा से धन-समृद्धि बढ़ती है।

त्योहारों की कतार, नवंबर में घर-घर होगा उत्सव
कार्तिक मास में इस बार व्रत और त्योहारों की लंबी शृंखला रहेगी। करवा चौथ से शुरू होने वाली उत्सवी रौनक धनतेरस, नरक चतुर्दशी और दीपावली तक पहुंचेगी। इसके बाद गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पर्व पर धार्मिक उत्साह दिखाई देगा। महीने के उत्तरार्ध में देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह और देव दीपावली के साथ पूजा-पाठ का विशेष दौर रहेगा।

कार्तिक मास के प्रमुख व्रत-त्योहार

  • 1 नवंबर : अहोई अष्टमी
  • 5 नवंबर : रमा एकादशी
  • 6 नवंबर : धनतेरस
  • 7 नवंबर : नरक चतुर्दशी
  • 8 नवंबर : दीपावली
  • 9 नवंबर : गोवर्धन पूजा
  • 10 नवंबर : भाई दूज
  • 13 से 16 नवंबर : छठ पूजा
  • 17 नवंबर : गोपाष्टमी
  • 18 नवंबर : आंवला नवमी
  • 20 नवंबर : देवउठनी एकादशी
  • 21 नवंबर : तुलसी विवाह
  • 23 नवंबर : बैकुंठ चतुर्दशी
  • 24 नवंबर : देव दीपावली और कार्तिक स्नान पूर्णिमा

20 नवंबर से फिर गूंजेंगी शहनाइयां
कार्तिक मास में शुक्र ग्रह के उदय और बालत्व दोष की समाप्ति को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार, 30 अक्टूबर को शुक्र उदय होगा और 2 नवंबर को शुक्र का बालत्व दोष समाप्त होगा। इसके बाद 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्यों का सिलसिला शुरू होगा। विवाह सहित अन्य शुभ आयोजनों की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए यह तिथि खास मानी जा रही है।

श्रद्धा के साथ करें ये पांच काम

  • रोज दीपदान करें : घर, मंदिर या पवित्र जलाशय के किनारे दीपक जलाकर आराधना करें।
  • तुलसी पूजन न भूलें : सुबह और शाम तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करें।
  • स्नान का रखें नियम : सामथ्र्य और सुविधा के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर दिन की शुरुआत करें।
  • गीता का पाठ करें : प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ें और उसके संदेशों को जीवन में अपनाने का प्रयास करें।
  • दान से जोड़ें पुण्य : जरूरतमंदों को अन्न और उपयोगी वस्तुएं दान करें।
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28 Oct 2026, 11:29 AM IST
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