
ग्वालियर। विधानसभा चुनाव से पहले एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ सपाक्स का महाभियान शुरु हो गया है। जिससे भाजपा कांग्रेस और बसपा सहित अन्य कई पार्टिंयों में खलबली मची हुई है। सपाक्स समाज व युवा संगठन के प्रांतीय आव्हान पर एक्ट्रोसिटी एक्ट के विरोध में चरणबद्ध महाआंदोलन शुरु कर दिया गया। बुधवार को सपाक्स की दतिया इकाई ने एट्रोसिटी एक्ट 2016 एवं 2018 में किए गए अमेंडमेंट वापस लेने को लेकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया है कि 5 अक्टूबर 18 को प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन देकर हमने मांग की थी कि एट्रोसिटी एक्ट में किए गए अमेंडमेंट तत्काल वापस लिए जाए, परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई है। सपाक्स ने ज्ञापन के माध्यम से एट्रोसिटी एक्ट 2016 एवं 2018 में किए गए अमेंडमेंट तत्काल वापस लिए जाए, एट्रोसिटी एक्ट के संबंध में एक पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मार्च 2018 में जो निर्देश दिए है, उन निर्देशों का पालन किया जाए, आईपीसी में जो अपराध जमानती है, उन मामलों में एफआईआर के बाद पहले जांच की जाए उसके बाद ही गिरफ्तारी हो।
ऐसे प्रावधान किए जाएं, ४३८ के अंतर्गत जो अग्रिम जमानत का प्रावधान है, एट्रोसिटी एक्ट में उस प्रावधान पर जो प्रतिबंध लगाया है उसे विलुप्त किया जाए, नौकरी पेशा लोगों और राजनेताओं को इस एक्ट के लाभ से पृथक किया जाए, जो लोग हिंदू धर्म से अन्य धर्मो में चले गए है उनको एट्रोसिटी एक्ट का लाभ नहीं दिया जाए।
साथ ही सरकार को यह भी निर्देश दिए जाएं कि इस देश के लोगों को जाति और धर्म के नाम से बांटने वाले कोई भी कानून न बनाए जाएं। ज्ञापन सौंपने वालों में राममोहन वर्मा, महेश गुप्ता, महिपाल सिंह, समीर श्रीवास्तव, राजीव शर्मा, शैवाल पाठक, वीरसिंह दांगी आदि शामिल रहे। महाआंदोलन के तहत गुरुवार को जन-जागृति के लिएप्रश्नात्मक पंपलेट का वितरण शहर एवं गांवों में किया जाएगा।