
Online Booking
ग्वालियर. त्योहार पर अपनों को मिठाई भेजनी हो, घर के लिए गिफ्ट मंगाना हो या पूजा सामग्री की ऑनलाइन बुकिंग करनी हो, तो जरा संभलकर करें। दरअसल बाजार में त्योहार की रौनक बढ़ने के साथ साइबर ठगों ने भी ठगी का नया जाल बिछाया है। जालसाज ऑनलाइन खरीदारी को हथियार बनाकर फर्जी ऑर्डर, डिलीवरी चार्ज और बुकिंग कन्फर्मेशन के नाम पर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच रहे हैं। ठगों के इस हथकंडे में फंसकर पैसा गंवाने वालों की शिकायतें पुलिस के सामने आ रही हैं। पीड़ितों का कहना है वह घर से दूर हैं त्योहार पर अपनों को कपड़े, गिफ्ट हैंपर, ड्रायफ्रूट और पूजा की सामग्री भेजने के लिए ऑनलाइन विज्ञापन देखकर बुकिंग की थी गलती यह रही कि जल्दबाजी में नामी ब्रांडस से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट्स पर भरोसा कर लिया।
आई पैड और टीवी बुकिंग में ठगी
डबरा निवासी राजकुमार प्रजापति ने शिकायत में बताया है कि त्योहार पर इलेक्ट्रोनिक सामान की खरीद पर भारी डिस्काउंट का ऑनलाइन विज्ञापन देखकर आइपैड और टीवी बुक की थी। खरीदारी से पहले विज्ञापन में दिए फोन नंबर पर बात की थी। उनसे बुकिंग कंफर्म के नाम पर 13 हजार रुपए एडवांस लिए गए थे, लेकिन सामान नहीं आया तब ठगी का आभास हुआ। अब ठगों का नंबर भी बंद है।
इस हथकंडे से ठगी का खेल
साइबर ठग मिठाई, गिफ्ट या पूजा सामग्री की ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर फोन या मैसेज भेज रहे हैं। झांसे में आने वालों से ठग ऑर्डर कंफर्म करने का हवाला देकर ऑनलाइन पैसा ऐंठ रहे हैं या फिर डिलीवरी चार्ज या पते की पुष्टि के नाम पर लिंक की आड़ में एपीके फाइल भेजकर फंसा रहे हैं ऑनलाइन खरीदारी करने वालों को लगता है कि वह प्रतिष्ठित कंपनी या प्रतिष्ठान से सामान खरीद रहे हैं तो ठगों के छलावे में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
कपड़े खरीदे 25 हजार ठगे, फोन बंद
माधौगंज निवासी लखविंदर सिंह ने साइबर पुलिस को बताया है उनका भाई सुखवीर सिंह बैंगलुरु में है। इस बार दीपावली पर उसका यहां आना मुश्किल है। इसलिए परिजन के ऑनलाइन कपड़े भेजने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग की थीं। खरीदारी का पेमेंट का एडवांस दिया था लेकिन कपड़े नहीं पहुंचे जब डिलीवरी को ट्रैक किया तो पता चला कि धोखा हो गया। जिस फोन नंबर पर सुखवीर ने संपर्क कर खरीदारी की थी वह भी बंद है।
त्योहार पर ठगी की शिकायतें ज्यादा…
साइबर ठग माहौल के हिसाब से ठगी के हथकंडे अपनाते हैं। जालसाजों को पता है दीपावली पर लोग खुलकर खरीदारी करते हैं। इसलिए जालसाजों ने फ्रॉड के लिए नए नए हथकंडे बनाए हैं। उनके जरिए लोगों को फंसा रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आ रहे हैं।
एक्सपर्ट व्यू
ठगों की साइकोलॉजी और ट्रैप
संजीव नयन शर्मा डीएसपी स्टेट साइबर सेल ग्वालियर
त्योहारी सीजन में ठग लोगों की दो कमजोरियां समय पर डिलीवरी की ङ्क्षचता और सस्ता सामान पाने के लालच का फायदा उठाते हैं। लोगों को फंसाने के एसईओ टूल्स के जरिए गूगल पर कंपनी के नाम पर अपना मोबाइल नंबर टॉप रिजल्ट्स में दिखाते हैं। झांसे में आने वाले को साइबर ठग 5 या 10 रुपए का डिलीवरी चार्ज भुगतान के लिए लिंक भेजते हैं जो मैलिशियस वेबपेज या एपीके फाइल होती है,इसके जरिए खरीदार के फोन का रिमोट एक्सेस या बैकिंग क्रेडेंशियल्स चुराते हैं। ठग ई-कॉमर्स पोर्टल्स की हूबहू दिखने वाली वेबसाइट बनाते हैं जिसका डोमेन नाम में असली से एक या दो ही अक्षर अलग होते हैं। जल्दबाजी में लोग इसे इसमें धोखा खाते हैं। इससे बचने के लिए हमेशा ब्रांडेड कंपनी की बेवसाइट पर ही पूरी तरह जांच परख कर ही संपर्क करना चाहिए।
Updated on:
21 Oct 2026 06:05 pm
Published on:
21 Oct 2026 06:05 pm
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