
ग्वालियर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने चुनावी दौरे के तहत बुधवार को जन आशीर्वाद यात्रा लेकर ग्वालियर आ रहे हैं। यह जन आशीर्वाद यात्रा चार विधानसभा क्षेत्रों में से गुजरेगी। तय कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2 बजे विमान से ग्वालियर आएंगे। महाराजपुरा विमानतल से वे पहले मुरार सर्किट हाउस पहुंचेंगे। वहां कुछ देर ठहरने के बाद 3 बजे करीब मुरार छावनी में ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की जनसभा को संबोधित करेंगे।
इसके बाद ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर और ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के लिए रथयात्रा शुरू होगी। पिछले चुनाव में भी सीएम ने जनआशीर्वाद यात्रा निकाली थी।
पांच साल में शहर में ज्यादा कुछ नहीं बदला। कई मसले आज भी वैसे ही अनसुलझे हैं। सीएम की यात्रा से एक दिन पहले पत्रिका टीम उन इलाकों में पहुंची जहां से वे गुजरने वाले हैं।
पत्रिका ने लोगों से बात कर इन क्षेत्रों की समस्याएं और अपेक्षाएं जानीं। ये वे सवाल हैं जिनका जवाब लोगों को सरकार, मुख्यमंत्री और अपने जनप्रतिनिधियों से चाहिए।
स्वागत के लिए कार्यकर्ताआें की बैठक
सीएम शिवराज सिंह चौहान 24 अक्टूबर को ग्वालियर में रोड शो के लिए आएंगे। इस रोड शो के दौरान इन्दरगंज चौराहे पर भाजपा नेता डा. सतीश सिंह सिकरवार और सुमावली के विधायक सत्यपाल सिंह नीटू के नेतृत्व में कार्यकर्ता सीएम का स्वागत करेंगे। इसकी तैयारियों को लेकर सतीश ने बैठक ली। इस बैठक में मुख्य रूप से भाजपा नेता राजेश्वर राव, चन्द्रप्रकाश गुप्ता, अवध धाकरे, धीरेन्द्र सिंह चौहान,अवधेश उपस्थित थे।
ये हैं पत्रिका के वरिष्ठ रिपोर्टर जो उन क्षेत्रों में पहुंचे जहां से मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा गुजरने वाली है।
ग्वालियर दक्षिण से राजेन्द्र तलेगांवकर
मार्ग : नदी गेट से शुरू होकर सराफा होते हुए शिंदे की छावनी पर खत्म,प्रमुख बाजार की सडक़ ही है सबसे ज्यादा खराब, लगते हैं झटके
ग्वालियर दक्षिण : दोपहर 2.०० बजे
जर्जर सडक़ और पार्किंग में फजीहत
नदी गेट चौराहा : यहां ट्रैफिक सिग्नल हैं लेकिन पालन कराने पुलिस नजर नहीं आती है। इस कारण यहां हमेशा ही जाम की स्थिति रहती है। जिसकी जैसी मर्जी हो अपना वाहन निकालकर ले जाता है। यहीं से महल का रास्ता है और यहीं पर प्रदेश की नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह भी रहती हैं।
इंदरगंज चौराहा : यहां शहर का प्रमुख दाल बाजार तथा जिला न्यायालय है। इस कारण इस चौराहे पर चारों ओर वाहन खड़े रहते हैं। दाल बाजार से तो दिन में निकल नहीं सकते यहां कई बार जाम लगता है। इस चौराहा पर चारों ओर से अवैध पार्किंग के कारण भरा रहता है।
महाराज बाड़ा : यहां उच्च न्यायालय के कई बार निर्देश के बाद भी अधिकारी क्षेत्र में पार्किंग का हल नहीं खोज पाएं हैं। दीवाली से पूर्व बाड़ा क्षेत्र में खरीदी के लिए आने वाले लोगों के लिए पार्किंग बड़ी समस्या है। फुटपाथ पर लगने वाली दुकानों की समस्या का भी समाधान नहीं निकल सका है।
सराफा बाजार : यहां बाजार सुबह से शाम तक वाहनों से भरा रहता है। दिन में जब ग्राहक आते हैं तब निकलने की भी जगह नहीं रहती। यहां गड्ढे इतने हैं कि उन्हें गिनना संभव नहीं है। गश्त का ताजिया से राम मंदिर तक सडक़ पर गड्ढों में पेच रिपेयरिंग की गई है।
"सराफा बाजार की सबसे बड़ी समस्या यहां की चार पहिया वाहनों की स्थायी पार्किंग है। इसके लिए पुलिस को कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन समस्या जस की तस है। वहीं शहर के प्रमुख बाजार की सडक़ भी खराब है।"
पुरुषोत्तम जैन, अध्यक्ष, सोना-चांदी व्यावसायी संघ सराफा बाजार
"सराफा बाजार में कार पार्किंग तो होना ही नहीं चाहिए। इस कारण यहां रोज गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है। पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था होना चाहिए।"
नीलेश बिंदल, मेंटोर, युवा सराफा संगठन
हजीरा से प्रवीण मिश्रा
ग्वालियर : दोपहर ३.०० बजे
जेसी मिल जैसी फैक्ट्री खुलवाकर रौनक लौटा दो
मार्ग-पड़ाव, लोको, से होते खेड़ापति कॉलोनी, फूलबाग तक,जेसी मिल, ग्रेसिम, स्टील फाउंड्री जैसी फैक्ट्रियां बंद हो गईं उपनगर के 14 हजार लोगों पर रोजी-रोटी का संकट है। बड़ी फैक्ट्री खुले तो हजीरा की रौनक लौटे।
लोको : लोको के आसपास ज्यादातर रेलवे में कार्यरत कर्मचारी रहते हैं। यहां सबसे अधिक पेयजल की समस्या है, सीवर लाइन भी पुरानी हो गई है, वह चाहे जब फूट जाती है। यहां की मुख्य सडक़ जर्जर है, उस पर हाल ही में नगर निगम ने मरहम लगाने का काम किया है।
स्टेट बैंक चौराहा : यहां एक नाला होता था, उसे पाटकर मकान बन गए हैं, जिससे बारिश का पानी न निकलने से यहां भरा रहता है। पार्किंग की कोई सुविधा न होने से सडक़ पर वाहन खड़े रहते हैं जो परेशानी का सबब हैं।
हजीरा चौराहा : लाखों रुपए के ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिससे आए दिन एक्सीडेंट होते हैं। हजीरा से चार शहर का नाका की सडक़ जर्जर है, क्षेत्र वैसे तो व्यावसायिक है, पर अतिक्रमण भी कम नहीं हैं। यहां तानसेन का मकबरा है, जो गंदगी की चपेट में है।
किलागेट चौराहा : इस मार्ग पर सिविल अस्पताल है, जहां न तो ओपीडी में डॉक्टर बैठते हैं, न मरीजों के लिए कोई सुविधा है। अस्पताल के बाहर अवैध रूप से फुटपाथ घेरकर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। यहां पानी की भी समस्या है।
किलागेट से मरीमाता तक : यह मार्ग पूरी तरह जर्जर था, सीएम के रोड शो की खबर मिलते ही किलागेट से सेवानगर तक की नई सडक़ बनाकर वोटरों को खुश करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वह यह भूल गए कि खेड़ापति कॉलोनी और मरी माता महलगांव तक की सडक़ में कई गड्ढे लोगों को दर्द दे रहे हैं।
किलागेट से कोटेश्वर मंदिर तक जाकर तो देखिए
ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र के अधिकतर लोगों की जुबान पर एक ही सवाल था कि मुख्यमंत्री को शहर का विकास देखना है तो वे अपने रोड शो के दौरान किलागेट चौराहे से कोटेश्वर मंदिर जाकर देखें, वहां १४० से अधिक गड्ढे हैं, रात में अंधेरा अलग रहता है। सडक़ भी इतनी सकरी है कि वहां से दो वाहन एक साथ नहीं निकल सकते।
"उपनगर ग्वालियर शुरुआत से ही विकास के मामले में पिछड़ा रहा है। नियमित पानी न मिलने से रतजगा करना पड़ता है। यहां बच्चों के लिए कोई मैदान नहीं हैं, रोजगार की व्यवस्था नहीं हैं। सीएम के आने पर यहां की सडक़ बनाई जा रही है, यह काम पहले क्यों नहीं कराया।"
दिलीप तोमर, समाजसेवी
ग्वालियर पूर्व और ग्रामीण से धमेन्द्र त्रिवेदी
ग्वालियर पूर्व: दोपहर 3.30 बजे
यात्रा के लिए आनन-फानन में भरे गड्ढे
मार्ग: तिकोनिया से कंपनी बाग होकर बारादरी चौराहा, भीमनगर, थाटीपुर पेट्रोल पंप तिराहा तक
जनआशीर्वाद यात्रा से पहले कभी नहीं ली निगम ने सुध
तिकोनिया : लगभग ३०० मीटर की सडक़ के दोनों ओर दुकानें हैं। मुख्य सडक़ से लगी हरिजन बस्ती की सडक़ कई साल से उखड़ी है, इसे बनाने निगम ने कभी प्रयास नहीं किए। पुरानी बस्तियों में बिजली की सप्लाई 24 घंटे में बमुश्किल ८ से १० घंटे है।
कंपनी बाग: निगम ने कंपनी बाग रामलीला मंचन के लिए दिया था, इसमें एक महीने के लिए रामलीला होना तय किया गया था, इसका फायदा उठाकर रामलीला कमेटी ने पूरे बाग पर अधिकार जमा रखा है।
सदर बाजार: 110फीट चौड़ी सडक़ पर गिर्राज मंदिर से लेकर चौराहे तक अतिक्रमण है। पांच साल में तीन बड़ी कार्रवाई भी हुई, लेकिन प्रशासन ठेले वालों को हटाने में विफल रहा।
बारादरी: क्षेत्र का मुख्य चौराहा है, इसके चारों ओर टेंपो चालकों का कब्जा रहता है। एमएच रोड पर लगभग १०० मीटर तक, सिंहपुर रोड पर 100 मीटर तक फल बेचने वालों का कब्जा है।
पांच साल में अस्थाई अतिक्रमण में बढ़ोतरी हुई है। यहां बने हॉकर्स जोन में एक बार ही सब्जी फल विक्रेताओं को पहुंचाया गया, इसके बाद निगम अधिकारियों ने लापरवाह रवैया अपना लिया, जो आमजन की परेशानी का कारण बना है।
"क्षेत्र में पानी की टंकी है, मेन रोड पर तो पानी पहुंचता है, लेकिन बस्तियों में प्रेशर से पानी नहीं पहुंचता। कैंट से लगे क्षेत्र में सालभर पानी की समस्या रहती है। जनप्रतिनिधियों को सब पता है, हर बार चुनावों में वादे करते हैं, लेकिन समस्या वहीं रहती है।"
संतोष, तिकोनिया
"क्षेत्र की कॉलोनियों में लगभग ३० हजार लोग निवासरत हैं, बाजारों में ५ हजार लोग हर दिन व्यापार के लिए आते हैं। अतिक्रमण की समस्या तो यहां सनातन हो गई है। रात १० बजे से सुबह ८ बजे तक ही असल सडक़ नजर आती है। दिन में सिर्फ ठेले वाले, रेहड़ी वालों का कब्जा रहता है। पानी की बात करें तो यहां अभी भी टैंकर मंगाना पड़ रहा है।"
प्रियदर्शी दीक्षित, घासमंडी
ग्वालियर ग्रामीण : शाम 4.30 बजे
वार्डों को अब तक नहीं मिला सिविल का दर्जा
मार्ग : तिकोनिया से एमएच रोड तक जाएगी।
यात्रा जहां से शुरू होगी, वहां व आसपास की कॉलोनियों की समस्याएं हल नहीं होने से जनता परेशान है।
तिकोनिया, एमएच रोड : जनआशीर्वाद यात्रा विधानसभा के सिविल और कैंट एरिया को छूते हुए निकलेगी। इसमें सडक़ के एक ओर की पट्टी ही ग्रामीण में आती है।
इस क्षेत्र में बंशीपुरा, हाथीखाना, हरदेव सिंह की टाल, सत्तारपुरा, काशीपुरा, निबुआपुरा, फूटी बैरक, एमएच रोड आदि को मिलाकर लगभग 40 हजार की जनसंख्या है। छावनी बोर्ड के वार्डों में रह रहे लोगों को अभी तक सिविल का दर्जा नहीं मिल पाया है।
अनुमतियां : छावनी बोर्ड में लोगों की समस्या भवन निर्माण अनुमति सहित अन्य अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने में दिक्कते की है। कुछ सालों में लोगों को कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही अनुमति मिल पाई है।
विधानसभा के अंतर्गत १५० से अधिक गांव हैं, जहां सीएम नहीं जा रहे हैं। इन गांवों में लोग १० साल से मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
पानी : यहां विधायक ने हैंडपंप लगवाने की घोषणा की थी। हैंडपंप खनन भी किए गए, लेकिन अधिकतर में पानी नहीं है। छावनी बोर्ड के पास पेयजल प्रदाय के लिए स्वतंत्र व्यवस्था नहीं है। पेयजल के लिए बोर्ड नगर निगम पर निर्भर है।
सडक़ : छावनी क्षेत्र की बस्तियों में सडक़ों की हालत बेहतर नहीं है। कुछ समय पूर्व बनी आरसीसी सडक़ों की घटिया गुणवत्ता की पोल खुलने लगी है। सेना की सडक़ों को छोडक़र एक भी सडक़ अच्छी नहीं है।