ग्वालियर. वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन से पहले अपनी आय का सही आकलन करना हर करदाता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। अक्सर देखा जाता है कि अंतिम समय में जल्दबाजी में किए गए निवेश या अधूरी जानकारी के आधार पर लिए गए फैसले टैक्स बचाने के बजाय अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और नोटिस जैसी […]
ग्वालियर. वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन से पहले अपनी आय का सही आकलन करना हर करदाता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। अक्सर देखा जाता है कि अंतिम समय में जल्दबाजी में किए गए निवेश या अधूरी जानकारी के आधार पर लिए गए फैसले टैक्स बचाने के बजाय अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और नोटिस जैसी समस्याओं को जन्म दे देते हैं। ऐसे में समय रहते आय, निवेश और कर देनदारी का व्यवस्थित मूल्यांकन करना आवश्यक है। करदाताओं को अपनी सभी आय स्रोतों जैसे वेतन, व्यवसायिक आय, बैंक ब्याज, किराया और कैपिटल गेन को जोडकऱ कुल आय का सही आकलन कर लेना चाहिए। इसके साथ ही, धारा 80सी, 80डी, 80जी जैसी प्रमुख कटौतियों का पूरा लाभ लेने के लिए योग्य निवेश और खर्च की समीक्षा करना भी जरूरी है।
80सी और एनपीएस निवेश भी, बचत भी
पुराने टैक्स रिजीम वालों के लिए 1.5 लाख रुपए तक की छूट (पीपीएफ, ईएलएसएस, एनएससी) का दरवाजा 31 मार्च को बंद हो जाएगा। इसके अलावा, एनपीएस में अतिरिक्त 50,000 रुपए डालकर आप अपनी टैक्स लायबिलिटी को और भी कम कर सकते हैं।
80सी में हाउस लोन पर मिलने वाली छूट
धारा 80सी के अंतर्गत करदाता अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक की कटौती का लाभ ले सकता है। इसमें हाउस लोन के ङ्क्षप्रसिपल अमाउंट का भुगतान भी शामिल होता है। इसके अलावा धारा 24(बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त छूट मिलती है (स्व-आवासीय संपत्ति के लिए)। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन खर्च भी 80सी में क्लेम किए जा सकते हैं (निर्धारित शर्तों के अनुसार)।
हेल्थ और कैपिटल गेन
खुद और परिवार के हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम (धारा 80डी) इसी महीने भरें। साथ ही, अगर शेयर बाजार या प्रॉपर्टी से तगड़ा मुनाफा हुआ है, तो उसे सेक्शन 54 या 54एफ के तहत निवेश कर बचा लें।
अग्रिम कर और स्वमूल्यांकन कर का महत्व
यदि वर्ष के दौरान टैक्स कम जमा हुआ है, तो करदाता एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स के माध्यम से समय रहते भुगतान कर सकता है। इससे ब्याज (धारा 234बी, 234सी) और पेनल्टी से बचाव संभव है।
टैक्स तुलना : पुरानी बनाम नई रिजीम व्यवस्था
आय 12 लाख : इसे समझने के लिए 12,00,000 (12 लाख) की सालाना आय का उदाहरण लेते हैं। इससे साफ हो जाएगा कि निवेश करने पर कौन सी व्यवस्था ज्यादा मारक साबित होगी। मान लेते हैं कि पुरानी व्यवस्था में करदाता 2,50,000 का कुल निवेश (80सी, 80डी और एनपीएस) दर्शाता है-
विवरण पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था
कुल सालाना आय क्र12,00,000 क्र12,00,000
स्टैंडर्ड डिडक्शन क्र(-) 50,000 क्र(-) 75,000
विवरण पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था
कुल सालाना आय क्र12,00,000 क्र12,00,000
स्टैंडर्ड डिडक्शन क्र(-) 50,000 क्र(-) 75,000
80सी निवेश क्र(-) 1,50,000 क्र0 (छूट नहीं)
विवरण पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था
80डी (हेल्थ इंश्योरेंस) क्र(-) 25,000 क्र0 (छूट नहीं)
NPS (80CCD(1B) क्र(-) 50,000 क्र0 (छूट नहीं)
कुल कर योग्य आय क्र9,25,000 क्र11,25,000
कुल टैक्स (4% सेस सहित) क्र1,01,400 क्र85,800
शुद्ध बचत — क्र15,600 की
समय से करें प्लानिंग
वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले आय और कर देनदारी का सही आकलन करना हर करदाता की जिम्मेदारी है। सही समय पर की गई टैक्स प्लानिंग न केवल टैक्स बचाती है, बल्कि भविष्य में आने वाली कानूनी और वित्तीय परेशानियों से भी बचाती है। करदाताओं को चाहिए कि वे अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें और योजनाबद्ध तरीके से अपने निवेश और टैक्स का प्रबंधन करें। -पंकज शर्मा, सीए