ग्वालियर

शोर में घुट रही पढ़ाई, वाहनों का आतंक बढ़ा रहा टेंशन, गिर सकता है विद्यार्थियों का स्कोर

प्रदूषण बोर्ड, शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होते ही शहर में ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा फिर गंभीर हो गया है। परीक्षा केंद्रों के बाहर से गुजर रहे वाहनों और गली-मोहल्ले का शोर निर्धारित मापदंड से दो गुना तक पहुंच रहा है। इससे न […]

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Feb 15, 2026
हायर सेकंडरी के विद्यार्थी परीक्षा देने जाते हुए। सडक़ पर वाहनों के चलते काफी शोर हो रहा है।

प्रदूषण बोर्ड, शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई

हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होते ही शहर में ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा फिर गंभीर हो गया है। परीक्षा केंद्रों के बाहर से गुजर रहे वाहनों और गली-मोहल्ले का शोर निर्धारित मापदंड से दो गुना तक पहुंच रहा है। इससे न सिर्फ परीक्षार्थियों की एकाग्रता भंग हो रही है, बल्कि उनका मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार तेज शोर में रहने से सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और सुनने की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। ऐसे में परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में यह स्थिति विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर सीधा असर डाल सकती है और उनका बोर्ड परीक्षा में स्कोर भी कम करा सकती है। क्योंकि आवासीय क्षेत्रों में 45 से 55, बाजार में 55 से 65 डेसिबल की ध्वनि और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 70 से 75 डेसिबल की सीमा तय की गई है, लेकिन इससे अधिक शोर मानव के लिए सुरक्षित नहीं है।

ये है स्कूलों के पास ध्वनि प्रदूषण की स्थिति
-जयेंद्रगंज में जीवाजी राव उमा विद्यालय के बाहर सडक़ सबसे व्यस्ततम है। यहां से हर दिन टेंपो, टैक्सी, चार पहिया, दो पहिया वाहन गुजरने के चलते भारी दबाव रहता है और वाहनों से काफी शोर होता है। यहां ध्वनि प्रदूषण का स्तर 71 डेसीबल तक है।
-कंपू स्थित पदमा कन्या विद्यालय के बाहर ही टेपो, टैक्सी, चार पहिया, दो पहिया वाहन व बस का आवागमन दिनभर रहता है। वाहनों से निकलने वाली ध्वनि छात्राओं के साथ आमजन व मरीजों को भी परेशान करती है। यहां 74 डेसीबल तक है। जबकि यह क्षेत्र साइलेट जोन में और यहां कमलाराजा अस्पताल भी बना हुआ है।
-सनातन धर्म कन्या उमा विद्यालय पर हर दिन काफी संख्या में दो व चार पहिया वाहन की लंबी कतार लगी रहती है। इससे विद्यालय में पढऩे वाले विद्यार्थी की एकाग्रता भी भंग होती है। यहां भी वाहनों के शोर के चलते 80 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण है।
-उत्कृष्ट विद्यालय मुरार क्रमांक 1 व 2 के बाहर भी काफी संख्या में हर दिन चार पहिया व दो पहिया वाहन गुजरते रहते है। इससे स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थी और पास ही बने अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी खासी परेशानी होती है। यहां वाहनों के शोर 81 डेसीबल तक है।

यह है मानक-कहां-कितना ध्वनि प्रदूषण
स्थान दिन रात
औद्योगिक क्षेत्र 75 70
व्यावसायिक 65 55
आवासीय क्षेत्र 55 45
शांत क्षेत्र 50 40

ध्वनि प्रदूषण कम करने के उपाय
पब्लिक खुद ही जागरुक हो, गैर जरूरी ध्वनि को कम करें, म्यूजिक कम आवाज में बजाए, स्कूलों व कॉलेजों के पास वाहनों का आवागमन रोका जाए, साउंड लेवल की जांच करने के लिए उपकरण लगाए व विभाग ध्वनि प्रदूषण की जांच करें।

एक्सपर्ट……
बढ़ते शोरगुल से तनाव के साथ लोगों में मनोरोग की समस्या आज तेजी से बढ़ रही है। शहर में गाडिय़ों की संख्या में वृद्धि होने से लोग खुलेआम अपने वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। परिवहन विभाग व प्रदूषण बोर्ड जांच अभियान चलाए और जहां तेज ध्वनि है वहां पर सख्त कार्रवाई करें।
डॉ अनीश पाण्डे, पर्यावरण विशेषज्ञ

Published on:
15 Feb 2026 10:58 pm
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