ग्वालियर

अब वह दिन दूर नहीं जब स्वर्णरेखा नाले में भी बहेगा साफ पानी

स्वर्णरेखा में साफ पानी बहाने के लिए अब लक्ष्मीबाई समाधि के पीछे की ओर बॉयोफिल्ट्रेशन पद्धति पर काम करने वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा सकता
2 min read
• •
Updated: 8 Sep 2018, 6:40 PM IST
swarn rekha
अब वह दिन दूर नहीं जब स्वर्णरेखा नाले में भी बहेगा साफ पानी

ग्वालियर. स्वर्णरेखा में साफ पानी बहाने के लिए अब लक्ष्मीबाई समाधि के पीछे की ओर बॉयोफिल्ट्रेशन पद्धति पर काम करने वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा सकता है। लगभग 500 वर्गमीटर में लगने वाला यह प्लांट पौधों की जड़ के जरिए 10 एमएलडी पानी साफ कर सकेगा। इसको लेकर शुक्रवार को नीदरलैंड्स सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर (शहरी विकास मंत्रालय के समकक्ष) के प्रतिनिधि डैनियल ने बाल भवन में प्रजेंटेशन दिया। प्लांट के लिए जगह की साइट फाइनल करने के लिए आज पूरा दल विजिट करेगा।
नीदरलैंड्स के प्रतिनिधि का कहना है कि इस प्लांट के जरिए पानी तो साफ होगा ही, इसके साथ-साथ रंग और गंधहीन बॉयोगैस भी मिलेगी, जिसका इस्तेमाल सामान्य कामों में किया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह प्लांट सफल रहा तो शहर के सीवर का पानी साफ करके स्वर्णरेखा में भरा जा सकता है। प्लांट लगाने के साथ ही रिवर फ्रंट डवलपमेंट, ग्रीन बैल्ट, वॉकिंग ट्रैक भी बनाए जाएंगे। पूरा प्रजेंटेशन देखने के बाद अब इसको लेकर विचार किया जा रहा है, फिर प्लांट लगाने के लिए एमओयू साइन किया जाएगा। प्रजेंटेशन के दौरान निगमायुक्त विनोद शर्मा, स्मार्ट सिटी सीईओ, वल्र्ड बैंक के एसोसिएट पार्टनर मुकुल महाजन, आउटरीच पार्टनर और स्मार्ट सिटी सीनियर मैनेजर राघवेन्द्र सिंह राजपूत, इंजीनियर शिशिर श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद थे।

यहां हो चुका भ्रमण
24 मई को नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री के देश का दौरा करने के बाद भारत सरकार ने बॉयो फिल्ट्रेशन प्लांट के लिए रजामंदी दी है। इसके बाद नीदरलैंड्स के प्रतिनिधि ने ग्वालियर से पहले बरेली, आगरा और करनाल का भ्रमण करके प्लांट लगाने की स्थितियों का अध्ययन किया है। इसके बाद अब ग्वालियर में आए हैं।

एसे समझें प्लांट की कार्यपद्धति
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बॉयोफिल्ट्रेशन पद्धति पर काम करेगा। पानी साफ करने कांक्रीट का टैंक बनाया जाएगा।
पानी साफ करने वाले प्लांट के टैंक में एक इनपुट और आउटपुट डोर होंगे।
इनपुट डोर से गंदा पानी आएगा और आउटपुट डोर से पानी बाहर निकलेगा।
पानी साफ करने कांक्रीट टैंक में मिट्टी भरी जाएगी, जो पानी की सतह तक होगी।
पौधे लगाए जाएंगे, जिनकी जड़ें सतह तक पहुंचेंगी और पानी से गंदगी को सोखेंगीं।
प्लांट की जड़ों के जरिए ट्रीटमेंट


यह होगा फायदा
सीवर चैनल के माध्यम से जो गंदा पानी आ रहा है, वह अभी सीधे जलालपुर निकल जाता है। प्लांट के जरिए इसको फूलबाग पर ही साफ करके नदी में भर सकेंगे। इससे फूलबाग जोन के एक किलोमीटर दूरी तक नदी में साफ पानी रहेगा। इसमें बोटिंग भी की जा सकेगी।

होगा बेहतर उपयोग
डैनियल का दावा है कि बॉयोफिल्ट्रेशन प्लांट के जरिए साफ किए गए सीवर के पानी को सिंचाई, दैनिक उपयोग में लिया जा सकता है। प्लांट से साफ किए पानी की गुणवत्ता पीने के पानी जैसी ही होगी।
इस पानी को ग्राउंड वाटर रीचार्जिंग के लिए काम में लिया जा सकता है।
सीवर चैनल के जरिए आने वाले पानी को साफ करके स्वर्णरेखा नदी में भरा जा सकता है।

Published on: