श्रीलंका और दुबई से ऑपरेट होने वाले 100 पैनल डॉटऑनलाइन सट्टा ऐप के लोकल सेंटर का जो खौफनाक सच सामने आया है, उसने पुलिस को भी चौंका दिया है। ग्वालियर के शिवनगर में सट्टा सेंटर चलाने वाले
ग्वालियर. श्रीलंका और दुबई से ऑपरेट होने वाले 100 पैनल डॉटऑनलाइन सट्टा ऐप के लोकल सेंटर का जो खौफनाक सच सामने आया है, उसने पुलिस को भी चौंका दिया है। ग्वालियर के शिवनगर में सट्टा सेंटर चलाने वाले पवन यादव और देवेंद्र यादव ने बिहार-यूपी से बुलाए गए 8 बुकियों को अपने ही घर में बंधक बनाकर रखा था। पुलिस रिमांड में बुकियों ने रोते हुए खुलासा किया कि उन्होंने पिछले डेढ़ महीने से सूरज की धूप तक नहीं देखी है। उन्हें कमरे में ताले के अंदर रखा जाता था और टॉयलेट जाने के लिए भी देवेंद्र के परिजन बारी-बारी से पहरेदारी करते हुए अपनी नजरों के सामने ले जाते थे।
क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आए बुकियों ने बताया कि सरगना पवन और देवेंद्र रोजाना लाखों रुपये कमा रहे थे। यदि कोई खिडक़ी से बाहर झांकने की कोशिश करता तो उसे जान से मारने की धमकी देते। दांव जीतने वाले ग्राहकों को पैसा वापस करने के बजाय, आरोपी मुनाफा अपने परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर उनके साथ धोखाधड़ी करते थे।
जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी देवेंद्र उर्फ देवा का पूरा परिवार इस अवैध कारोबार में लिप्त था। देवेंद्र सट्टे की काली कमाई को अपनी मां भगवती यादव और भाई चंद्रपाल यादव के बैंक खातों में खपा रहा था। पुलिस को आरोपियों के पास से 47 एटीएम कार्ड मिले हैं। अब तक 38 बैंक खातों की डिटेल मांगी गई है, जिनमें शुरुआती तौर पर ढाई करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट के लिए सबसे ज्यादा ’म्यूल’ (किराए के) बैंक खाते दतिया जिले से खरीदे गए थे।
बीते रविवार को क्राइम ब्रांच ने शिवनगर (मोतीझील) में धर्मपाल ङ्क्षसह यादव के मकान पर दबिश देकर ऑनलाइन सट्टा पकड़ा था। मौके से मिथुन, पुनीत, चंदन, संतोष, रिशु, गोलू, सागर और विकास (सभी बिहार-आगरा निवासी) को सट्टा लगाते गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 6 को जेल भेज दिया गया है। फिलहाल मुख्य सरगना पवन, देवेंद्र और उनके दो खास गुर्गे विकास और रिशु 3 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं।
दोनों मुख्य सट्टा सरगनाओं समेत दो भरोसेमंद बुकियों को तीन दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपियों के कब्जे से मिले 47 एटीएम और 38 बैंक खातों की विस्तृत जानकारी बैंकों से मांगी गई है। सट्टे की रकम परिवार के सदस्यों के खातों में भी ट्रांसफर की गई है, जिसकी गहराई से जांच चल रही है।
— अमित शर्मा, क्राइम ब्रांच टीआइ, ग्वालियर